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उल्लू से उल्लू का पट्ठा बहुत वजनदार होता है : चच्चा टिप्पू सिंह

11/03/2009 Leave a Comment

आज हमारा चर्चा का मूड नही था पर का करें?   ऊ मिसिर जी कहे रहिन कि चच्चा कछु छूट गवा है वापस आवो ..अऊर ऊ  वाणीगीत  अऊर  जी.के. अवधिया  कहे रहिन ..त हमे आज वापस आना ही पडा…का करें चच्चा का दिल ई अईसन है कि भतिजा भतिजी लोगन का कहना नाही टार सकत हैं….बहुते परेशान करने लग गये बच्चूआ लोग आप तो? अरे भाई हमका दिन मा नौकरी भी करनी पडत है कि नाही?   हमार पिछला पोस्टवा से ई टिप्पणिया देखा जाये जिसका वजह से हम तुरंते वापस आया हु.

 

दिखाने को सांप और अजगर, बेचने को दंतमंजन : चच्चा टिप्पू सिंह

 

My Photoवाणी गीत    November 3, 2009 7:57 AM

बहुत संतुलित टिपण्णी चर्चा ...कौन सा जासूसी कैमरा रखे हैं ..छाँट छाँट कर टिपण्णी लाने का ...फुरसत मिलेगे तो नहीं ...फुरसत तो निकालनी ही पड़ेगी ..!!

 

जी.के. अवधियाMy Photo
November 3, 2009 2:30 PM

फुरसत न मिले तो भी क्या अपने स्नेहियों के लिये फुरसन नहीं निकालेंगे?

 

 

 

 

तो ई ल्यो …चच्चा आगये हैं वापस अऊर टिप टिप करते हुये शुरु कर रहा हूं ई टिप्पणी चर्चा……  आज चिठ्ठा चर्चा का पोस्टवा मां शुकुल जी फ़िर अंत मा हमको गरियाता हुआ बताये हैं त ऊ का जवाब भी इस टिप्पणी चर्चा का अंत मा ही देना पडेगा ना?

 

हमारी ललनाओं की छाती पर अपनी कुत्सित नंगी जांघें दिखाने की दु:शासनी वासना को धिक्कार  पर हमारी पिछली पोस्ट के

बाद भी टिप्पणीयों का सिलसिला जारी रहा, कुछ अऊर टिप्पणिय़ां देखी जाये….

 

अनूप शुक्ल  November 02, 2009 11:15 PM

@ पाबलाजी, कविताजी की पिछली कुछ चर्चाओं के क्रम से शीर्षक निम्नवत हैं:
१. टिप्पणियों के रूप में कड़ी भर्त्सना और आरोप झेलने को मिलने वाले हैं आज
२. लाख करे पतझड़ कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
३. जरा सी आहट होती है तो दिल...
४.घड़ी किन किन कारणों से रुकती/बिगड़ती हैं:घड़ीसाज के औजार...
५.रूठे कैसे नहीं बचे अब मान-मनौव्वल के किस्से
६.अपने कुत्ते के स्नेह को इस बात का अकाट्य प्रमाण मानकर चलो कि आप वास्तव में विलक्षण हैं।
७. धूल की मोटी परतें हैं पर उन परतों पर कहीं हैं नहीं अब उन नंगे पैरों के निशान
८.डायरी की अंतर्मुखता बनाम ब्लॉग का बहिर्मुख स्वभाव!
९.बलिदान:बलिदानी:भारतमाता की जय
१०.बिछ़ड़ना है दिलासा दे रहे हैं/हम एक दूजे को धोखा दे रहे हैं।
कृपया अपनी टिप्पणी देख लीजिये दुबारा और बताइये कि इन दस में कौन सा शीर्षक इस तरह का है? संभव है तो बतायें कि आपकी समझ इस तरह क्यों है कि आपकी समझ से यह बात परे कैसे हो गयी?

 

अनूप शुक्ल  November 02, 2009 11:47 PM

बाकी रचनाजी और अरविन्द मिश्र जी से क्या कहें? चंद्रमौलेश्वर जी और इसके पहले सतीश सक्सेनाजी काफ़ी कह चुके। वैसे अरविन्दजी के बारे में मुझे यह विश्वास होता जा रहा है कि वे कुछ भी कह सकते है। एक जगह कही बात के धुर उलट दूसरी जगह कह सकते हैं।
डा.अमर कुमार जी को उनके अनुज के निधन पर हार्दिक संवेदनायें।

 

  बी एस पाबला    November 03, 2009 7:04 AM My Photo

@ अनूप शुक्ल जी,
औरतों के जननांग पर फहरा दो विजय की पताका? याद होगा आपको जिसमें
रंजना [रंजू भाटिया] की ही टिप्पणी हैं कि कविता जी ..मैं इस शीर्षक को नहीं समझ पायी कि इस चर्चा को यह शीर्षक क्यों?
अल्पना वर्मा जी की टिप्पणी है कि मेरी 'छोटी सी 'निरीह बुद्धि इस शीर्षक के तर्क को गले उतार नहीं पाई. आप को मेरे मत से फरक नहीं पड़ेगा यह मैं जानती हूँ लेकिन अगर यही शीर्षक इन्हीं तर्कों के साथ अगर किसी पुरुष ब्लॉगर ने दिया होता क्या तब भी आप और आप के समर्थक उसे सहर्ष स्वीकारते ? मुझे अपना मत देना था सो चुप नहीं न बैठ सकी .अगर इस का कोई और शीर्षक भी रखा जाता तब भी आप का सन्देश सब तक पहुँचता ही... शीर्षक पढ़ कर इस चर्चा को शीर्षक देने वाला संवेदनहीन लगा... आप ने भी यह साबित कर दिया सिर्फ कुछ किताबें लिखने और साहित्य के मंच तक पहुँचने से कोई बड़ा नहीं हो जाता.
ज़वाब में कविता जी का कहना है कि इन सब आपत्तियों की परवाह करना मुझे आवश्यक नहीं लगता। किसी को अच्छा लगता है बुरा - यह मेरे विवेक को विचलित नहीं करता न कर सकता। जिसे जो समझना है समझे। मैंने ऐसा लिखा है और डंके की चोट पर लिखा है। जिसका जो जी चाहे पढ़े, न चाहे- न पढ़े।
आपका भी तो मौजियाने वाला प्रिय वाक्य है ना हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
तो फिर मेरी एक लाईन की टिप्पणी पर यह दस का दम क्यों भई?
क्या कहूँ।
अपनी अपनी समझ
सुबह-सुबह स्वर्गीय मुकेश का एक गीत भी याद आ रहा
बेगानी शादी में... दीवाना ... ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना
है ना
बी एस पाबला

 

My Photo  राजेश स्वार्थी    November 03, 2009 7:26 AM

पाबला जी, मठाधीशों और उनके चेलों के खिलाफ नहीं बोला करिये, वरना आप को भुगतान करना होगा। ये सबको आपके खिलाफ भड़कायेंगे।
कोई इनकी पोल पट्टी खोल गया है कि ये ही इलाहाबाद में निमंत्रण तय कर रहे थे, इसलिये बौराये हुये किसी को भी दबोच सकते हैं।
इनका चेला अपनी औकात उपर टिपनी में दिखा गया है और अब पंकज जी के जबाब देने में कहीं जा छिपा है.
ये बेगैरत लोग हैं। रचना जी और अरविंद मिश्र इनका पहला निशाना बने हुये हैं।
इस मंच को अपना मंच माने बैठे ये मठाधीश। इनको मूढ़मति का अविनाश सही सर्टीफिकेट दिये थे।



My Photo सतीश सक्सेना  November 03, 2009 8:33 AM

अपने विचार व्यक्त करना हम सबका अधिकार है, हर पाठक अपनी अपनी सोच और उस विषय पर अपने ज्ञान के आधार पर ही पढता और समझता है !प्रतिक्रिया इस समझ का फल है ! मेरी समझ में हम व्यक्तिगत आक्षेपों से तो बच ही सकते हैं मगर इसका प्रयास कोई नहीं करता !
हिन्दी ब्लाग जगत में बदगुमानी मशहूर रही है, बेहद सम्मानित ब्लागर और लेखक भी एक दूसरे पर कीचड उछालते देखे जा सकते हैं ! व्यक्तिगत तौर पर मैं जिन लोगों का सिर्फ उनके लेखन और विचारों के कारण बेहद सम्मान करता हूँ उनकी पगड़ी उछाले जाने का कई बार गवाह बना हूँ ! खुद मुझे कई बार शालीन लगने वाले, सुसंस्कृत लोगों से, बिना दुर्भावना, बेहद भद्दी गाली सहन करनी पड़ी है ! मैं सर्विस एसोसिअशन और ट्रेड यूनियन से सम्बंधित हूँ और इस निरंकुश भाषा पर मेरा पूरा अधिकार है मगर इसे मैं अपने बड़ों पर या बच्चों पर प्रयोग करुँ , मेरा मन इसकी अनुमति नहीं देता और झंडे गाड़ने का मेरा कोई उद्देश्य नहीं है ! अतः गालियाँ और वैमनस्य के बावजूद यहाँ रहता हूँ ताकि छोटे बड़ों से कुछ सीख सकूं !


अंत में जो अनजाने में ही मेरे प्रति वैमनस्य रखते हों उनके लिए पूरे अपनापन के साथ यह विनम्र निवेदन ...
बदगुमानी आपस में देर तक नहीं रखना
रंजिशें भुलाने को,एक सलाम काफी है !
आप सबको सादर !


चाँद फिर निकला

 

राज भाटिय़ा Says:My Photo

Posted on November 3, 2009 12:30 AM

तोड़ कर खिलोनो की तरह यह दिल
किसके सहारे छोड़ देते हो यह दिल
बहुत सुंदर रचना, हर शेर लाजवाव आप की गजल का
धन्यवाद

 

 

सचिन दा और मन्ना दा की जुगलबंदी - कव्वाली - किसनें चिलमन से मारा...

 

My Photo  अल्पना वर्मा said...

Sachin dev Burman जी के बारे mein kayee नयी baten आप की post से maluum huin.
-आप का gaaya गीत सुना--बहुत ही achcha gaaya है.लगा के जैसे original गीत सुन रहे हैं.
एक बहुत ही madhur गीत sunwane के लिए abhaar.

November 3, 2009 10:55 AM

 

गुल्ली की गुगली...खुशदीप

 

'अदा' said... My Photo

हा हा हा हा
खुशदीप जी,
हम भी उसी उल्लू..........के लिए ये कमेन्ट दिए जा रहे हैं....
और गुल्ली को मेरा बहुत बहुत प्यार कहियेगा....
हा हा हा हा
जय हिंद...

November 3, 2009 1:01 AM

 

My Photo  दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

उल्लू से उल्लू का पट्ठा बहुत वजनदार होता है।

November 3, 2009 8:18 AM

 

 

बोलो जय सियाराम...

 

Udan Tashtari said... My Photo

बात आप तक पहूंचे तो टिप्पणियों से सूचित करें...हा हा!! एकदम मंच वाला माहौल खींच दिया शुरु में ही, रवि भाई.
बहुत खूब::
बोलो जय सिया राम...बड़े दूर की मार है.

NOVEMBER 3, 2009 2:16 AM

 

नवम्बर , आरम्भ हो गया है .........

 

My Photo  Dr. Smt. ajit gupta said...

ज्‍योति कलश छलके, गीत पूरा पढ़ने का मन हो गया। लावण्‍या जी बहुत अच्‍छी पोस्‍ट है। दरवाजे के पीछे 2010 की कल्‍पना भी बहुत अच्‍छी है। बधाई।

NOVEMBER 2, 2009 11:00 PM

 

सु.अल्पना वर्मा जी की पहली पोस्ट (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की)

 

Ratan Singh Shekhawat said... @ November 3, 2009 6:47 AM My Photo

नई शुरुआत का यह प्रयास भी बहुत अच्छा है | किसी भी ब्लोगर की पहली पोस्ट अक्सर बिना पढ़ी ही रह जाती है आपके इस प्रयास से वो पढ़ी जा सकेंगी |

 

 

प्रथम परमवीरचक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा की स्मृति में

 

My Photo  लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

3 November, 2009 8:44 AM

 

"अपनी आज़ादी को हम
हरगिज़ मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन ,
सर झुका सकते नहीं "
क्या जज्बा है -
क्या वीरता है
क्या साहस , क्या दीलेरी है
आफरीन ...आफरीन ...
गौतम भाई ,
अब पता चला
आप एक बहादुर परम्परा के वाहक हैं -
भारत माता को अपने परमवीर बेटे पर
नाज़ है -
हम हिन्दोस्तानीयों को,
आप जैसे बहादुर रक्षकों को पाकर ,
ही अमनो चैन हासिल है
ये भी जानती हूँ
ईश्वर आपको दीर्घायु करें
- मेजर सोमनाथ शर्मा को
बारम्बार , नमन --
जय हिंद - जय हिंद की सेना
- लावण्या

 

मुझे ही मनाना है मम्मी का जन्मदिन..

 

ताऊ रामपुरिया November 3, 2009 10:38 AM  My Photo

हार्दिक बधाई आपकी मम्मा जी को.
मेरा आईडिया सुन..मम्मा का जन्मदिन मनाने का...आज सबसे ज्यादा शैतानियां करना दिन भर कारण कि आज उनका जन्मदिन है तो तेरे डांट खाने के चांस खत्म और पापा भी नही है. सो सारी कसर आज पूरी करले.:) डरने वाली तो आज कोई बात ही नही है.
रामराम

 

प्रथम किरण संग ओस घास पर मोती जैसा लगता है

 

रचना November 03, 2009 9:41 AM

आज कल ये नया चलन होगया हैं हिन्दी ब्लॉग जगत मे की महिला के प्रोफाइल जैसे प्रोफाइल बना कर टिप्पणी करो । इस चर्चा मंच सहित बहुत से ऐसे मंच हैं जहाँ जहीन ब्लॉगर एक दूसरे से रंजिश निकाल रहे हैं पर नाम ऐसे हैं जो मूलत किसी महिला ब्लॉगर के नाम से मिलते हैं । अपनी जहिनियत मे अपनी जहालत दिखाने से क्या मिलने वाला हैं , छद्म नाम रखना हैं तो कोई भी रख लो क्या फरक पडेगा । बिना नाम के भी गाली दी जा सकती हैं , किसी दूसरे के नाम की आड़ मे अपने मंतव्य पूरे करने से क्या आप उस " नाम " के बराबर हो जायेगे !!!!!!!! ।
महिला के नामो की आड़ लेकर जो पुरूष कमेन्ट लिख रहे हैं मेरी नज़र मे वो नर , नारी और किन्नर मे से कुछ भी नहीं हैं ।

 

Noahy up in the air.htm

तो ई तो हो गई आज की टिप्पणि चर्चा अऊर आज का एक बहुते जोरदार अऊर सुंदर चित्र देखा जाये अऊर जहां से हम ई सुंदर फ़ोटुआ लाये हैं ऊ  पोस्टवा पढिये..बहुते जोरदार पोस्टवा है. .. नवम्बर , आरम्भ हो गया है .........

 

अऊर अब तनि बात अंत की करली जाये।    ई शुकुल जी महराज जब भी लिखत हैं चच्चा के जरुर गरियाता हुआ बतावत हैं…हम पूछत हूं ..काहे शुकुल जी?  काहे हमरा से पंगा लेत हैं?  हम कौन आपका भैंसिया ले भागा हूं?  अरे आप चिठ्ठा चर्चा करत हैं  हम टिप्पणी चर्चा करत हूं…फ़िर भाई आप काहे परेशान हैं जो कुछ मन मा रख लिये..अऊर कुछ बता दिये?   ईहां ई सब तो गलते बात है..अब आपका जवाब पहले की तरह ही दे ना जरुरी है का?

 

चलिये ई सब छोडा जाये.. अऊर मुद्दे कि बात पर आया जाये ..आपने जो लिखा है ऊका जवाब दे देत हैं…नीचे पढ लिजिये  अऊर हो सके त चच्चा टिप्पू सिंह को शांति से कमा  कर खाने दिजिये..अगर हमरा नौकरिया छूट गया ना जी त हम  चच्ची अऊर बच्चा लोगन को लईके आपका ईहां ही डेरा लगाऊंगा.  ई समझ लिजियेगा।

 

और अंत में: 

शुकुल जी कहिन

आज की चर्चा में इतना ही। बाकी आप मजे में रहिये।

पिछले कुछ दिनों में तमाम टेम्पलेट बदले गये। लोगों की प्रतिक्रियायें आईं। अब पाठकों की राय पर जल्द ही पहले वाला टेम्पलेट ही लगा दिया जायेगा।

 

चच्चा टिप्पू सिंह जवाब दिहिन –

हम तो पहले ही कहा रहा कि ई सब टेम्पलेटवा बहुते बेकार है, आप पुराना वाला लगाईये ..हम भी वही लागा लूंगा, ऊ बडा अच्छा रहा..बहुते धन्यवाद आपको।

 

शुकुल जी कहिन

इस टेम्पलेट चस्पाई से चर्चा का काम गौण हो गया। चिट्ठाचर्चा से ज्यादा टेम्पलेट चर्चा होती रही।

 

चच्चा टिप्पू सिंह जवाब दिहिन -

ई सबका का दोषी चच्चा नाही…बल्कि आपका चेलवा चपटवा हैं अऊर हैड होबे के नाते आपई ज्यादा जिम्मेदार हैं मालिक।

 

शुकुल जी कहिन

लेकिन इस दौरान लोगों के बारे में काफ़ी कुछ पता चला। पता चला कि एक अनामी व्यक्ति एक ब्लागर को पकड़कर उससे ब्लाग लिखवा लेता है और उसको उसके बारे में कुछ पता नहीं चलता। लिखने का काम तुम संभालो बच्चा। गरियाने का काम हमारे लिये छोड़ दो।

 

चच्चा टिप्पू सिंह जवाब दिहिन –

शुकुल जी आप काहे झेंप मिटावत हैं? आपको सब कुछ पल्ले सिरे से मालूम है मालिक… अऊर शुकुल जी आप लिंक देकर भी अजय झा जी को अनाम क्यों कह रहे हैं? ऊ त खुल्लमखुला कहता है कि ऊ चच्चा के साथ फ़ेविकोल का तरह जुडा है। ऊ कोनू अनाम नाही है । अऊर ऊ जो लिखत हैं अपनी मर्जी  से लिखत हैं. ऊ शेर दिल इंसान है जो कहता है करता है। ऊ पीठ पीछे छुरी चलाने वाला इंसान नाही है. अऊर आप क्युं एतना तकलीफ़ पा रहे हैं?

आप अपना ई सब शब्द वापस लिजिये झा जी का बारे मे जो कुछ आप कहे हैं.  अऊर आप हमको अनाम कहते हैं त ई बताईये अगर मैं अपना प्रोफ़ाईलवा मा लिख दूंगा कि हम एक ठो बडका डाक्टरवा..इंजीनियरवा या कोनू अऊर लंबरी आदमी हूं त क्या सही हो जायेगा?

हम अपना मर्जी है किसी से अपना नाम गाम बताऊं या ना बताऊं?  पर इससे हमारा नीयत खराब नाही ना होता है ? अऊर केतना सारा लोग है? आप बताओ कि हम अनाम रहकर किसको गाली दिया हूं?  आप लोग तो सनाम रहकर खुले आम गाली दे रहे हैं। हमको बदनाम करते हैं कि गरियाता है..झा जी को लिंक देकर अनाम बता रहे हैं? तो कौन गडबड है? आप की हम?   हम सब समझता हूं।

शुकुल जी कहिन

पता चला कि साथी लोगों में एक-दूसरे से धुर उलट भाव वाली पोस्टों से एक ही समय में प्रभावित होने  की अद्भुत क्षमता है।

पता चला कि हम भी अनामी लोगों के नाम से अपने ही खिलाफ़ लिखते हैं। संदर्भ  RS की टिप्पणी-( ye shak to hume bhi kai din se tha ki Tipu chacha aur Fursatiya ek hi hain... bas logo se chhipane ke liye bhasha badal ke likhte hain. hum serious hain aapkee tarah majak nahi kar rahe)

 

चच्चा टिप्पू सिंह जवाब दिहिन -

अब ई भी आप जानते हैं कि चच्चा टिप्पू सिंह सिर्फ़ उसको गरियाने वालों को ही गरियाता है..आप लोगन की तरह नाही कि दुकान खोल लिये अऊर बंदरों का हाथ मा उस्तरा  पकडाय दिया कि चलो करो जो करना है.  लोग तो क्या क्या नाही कहेंगे?   आपके चेले चपटवो के अलावा दूसरे लोग भी इज्जतदार हैं शुकुल जी महराज।

 

शुकुल जी कहिन

और बहुत कुछ पता चला वह सब मन में है।

फ़िलहाल इतना ही। बाकी चलता रहेगा।

 

चच्चा टिप्पू सिंह जवाब दिहिन -

लो, अब इत्ता सारा चच्चा को गरिया लिया अऊर अभी मन मा बाकी ही रह गया?  निकाल ल्यो मालिक..निकाल ल्यो..मन मा रखने से मन खराब हो जात है…बाकी क्या करें?  अब हम भी तनि आराम करबे को जात हैं. आप जब भी लिखोगे ना शुकुल जी आपको तुरंते जवाब दूंगा।

 

अब चच्चा टिप टिप करते करते घर जायेंगे..अऊर जब हुई फ़ुरसत तब हम प्रकट हो जाऊंगा।

15 comments »

  • रंजन said:  

    टिप्पणीया क्या है.. तोप के गोले है...

  • Arvind Mishra said:  

    ब्लाग वार,टेम्पलेट वार के बाद अब कौन वार? क्या अगला वार्डवार यहीं हो जायेगा का ? मित्र देशों की फौज इकट्ठी हो रही है ! मेजर चार्ल्स विनी कुलमुला रहा है -लिटिल बॉय उछल रहा है ,फैट बॉय उकरू मुकरु हो उठा है ! लक्षण कुछ ठीक दिख नहीं रहा -हम तो रक्षा कवच ले लेगें ! युद्ध शुरू हुआ तो कहाँ आखिर परान लेकर भागेंगे ?
    चाचा मैं तो अब तक सच्ची माफी मांग लिया होता -अब भतीजों और चाचा से कौन लराई?

  • महेन्द्र मिश्र said:  

    बढ़िया टिपण्णी चर्चा सौ टके की .....आनंद आ गया ...बधाई.

  • 'अदा' said:  

    हई देखिये तो तनी ...!!
    हमहूँ तो गोड़-हाथ जोड़े थे और हमहूँ तो भतिजिन हैं...हमरा बात का कौन इम्पोर्तांस नही है का !!....
    मार एतना महीनत से चार लाइन का कवितो लिख मारे ...कि फुर्सत का बात काहे करते हैं ....ठीक है ठीक है....का करें जबाने ख़राब है....कपार में जोन लिखल है वही न मिलेगा.....
    बाकि टिपण्णी चर्चा रोकने का बारे में तो सोचिये भी मत ...कुछो कीजिये ..रात में दुइये घंटा सुतिये....लेकिन टिपण्णी चर्चा चलना चाही..........

  • दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said:  

    चर्चा अच्छी है, चिट्ठा चर्चा और टिप्पणी चर्चा के बीच की नोंक-झोंक और टेम्पलेट बदल प्रतियोगिता ने इसे और मजेदार बना दिया है। क्रिकेट मैच का मजा भी फीका लगने लगता है। टिप्पू चच्चा और शुकुल जी इसे बंद मत करो ना सारा रोमांच चला जाएगा।

  • Mishra Pankaj said:  

    चच्चा जयराम.......
    चर्चा त मजेदार बा और जवाब जोरदार

  • SELECTION & COLLECTION SELECTION & COLLECTION said:  

    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    जय ब्लोगिग विजय ब्लोगिग
    ★☆★☆★☆★☆★☆★☆★☆★
    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
    चच्चा! धो डाला आपने !
    चर्चा मे सब कुछ समेट लेना यह कोई आप्से सिखे..... तनिक गरिब लोगो पे भी
    अपनी दिव्य दृष्टि बनाऍ रखे।
    हार्दीक शुभ ईच्छा
    ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥

    पहेली मे भाग लेने के लिऎ निचे चटका लगाऎ

    कोन चिठाकार है जो समुन्द्र के किनारे ठ्हल रहे है

    अणुव्रत प्रवर्तक आचार्य तुलसी

    मुम्बई-टाईगर

     

  • शरद कोकास said:  

    इस टिप्पणी विधा के अविष्कारक को प्रणाम और इस विधा को पुष्पित-पल्लवित करने वाले टिप्पू चच्चा को सलाम।

  • वाणी गीत said:  

    अदाजी की शिकायत वाजिब है ...सबसे पहले उन्होंने ही अनुरोध किया था ...
    टिपण्णी चर्चा तो लाजवाब है ही ..शुकुल जी और चाचा टीपू सिंह जी की नोक झोंक तडके का काम करती है ...बहुत बढ़िया ...शुभकामनायें ..!!

  • Ratan Singh Shekhawat said:  

    बढ़िया टिप्पणियाँ और खरी बाते :)

  • Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said:  

    बहुत बढ़िया
    शुभकामनाएँ।

  • Nirmla Kapila said:  

    bahut badhia charcha hai bachha tippu singh. dhanyavaad aur shubhakaamanaayen

  • पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said:  

    "उल्लू से उल्लू का पट्ठा बहुत वजनदार होता है"

    सत्य वचन्!!
    :)

  • रचना said:  

    रचना November 03, 2009 9:41 AM

    आज कल ये नया चलन होगया हैं हिन्दी ब्लॉग जगत मे की महिला के प्रोफाइल जैसे प्रोफाइल बना कर टिप्पणी करो । इस चर्चा मंच सहित बहुत से ऐसे मंच हैं जहाँ जहीन ब्लॉगर एक दूसरे से रंजिश निकाल रहे हैं पर नाम ऐसे हैं जो मूलत किसी महिला ब्लॉगर के नाम से मिलते हैं । अपनी जहिनियत मे अपनी जहालत दिखाने से क्या मिलने वाला हैं , छद्म नाम रखना हैं तो कोई भी रख लो क्या फरक पडेगा । बिना नाम के भी गाली दी जा सकती हैं , किसी दूसरे के नाम की आड़ मे अपने मंतव्य पूरे करने से क्या आप उस " नाम " के बराबर हो जायेगे !!!!!!!! ।
    महिला के नामो की आड़ लेकर जो पुरूष कमेन्ट लिख रहे हैं मेरी नज़र मे वो नर , नारी और किन्नर मे से कुछ भी नहीं हैं ।

    please delete this from your post i requested before also and i was told they will be deleted but they are still there
    regds

  • गौतम राजरिशी said:  

    बड़े दिनों से इस प्रकरण को देख रहा था, कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा था। आज फुरसत में तमाम पुरानी पोस्टों को खंगाल कर देखा, फिर भी कुछ समझ में नहीं आया...

    कुछ ज्यादा ही नहीं खिंच गयी है ये कथित नोंक-झोंक? दोनों दिग्गजों से विनती है कि इसे अब यहीं लगाम दें, प्लीज!

    टिप्प्णी-चर्चा के रूप में ये एक प्रशंसनीय मंच है, और अपने पोस्ट पर लावण्या दी की प्रेरक टिप्पणी को यहाँ देखकर खुशी हुई।

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