दिल तो भटकता बंजारा है कब कहाँ घूम जाए ?

11/14/2009 Leave a Comment

लो जी बचूआ लोग..आगये चच्चा टिप्पूसिंह लौट के…तो सबसे पहले तो आप लोगन को हमारी टिप टिप..अऊर एकरा बाद मा…हम शुरु करत हैं आज का टिप्पणी चर्चा….पर आप लोगन का दिमाग मा ई सवाल जरुर होगा कि चच्चा आखिर इतने दिन कहां गये रहे? त भैया बिल्कुले सही सवाल बा तोहरा.

 

ऊ हुआ ये कि हम अऊर तुहार चच्ची हमरा लरिका का पास हांगकांग गये रहिन…अऊर उंहां नाती पोतन का साथ ई तुहार टिप्पणी मिप्पणी चर्चा यादे नई आई…सो माफ़ी चाही आप लोगन से…अऊर सुना कि शुकुल जी १००० पोस्टवा का जश्न मना लिये बडी ठसक से…त बधाई हो शुकुलज ी आपको…पर शुकुल जी किसी को गरियाकर अऊर दुख पहुंचाकर जश्न मनाये त क्या मनाये? हम आपसे त अंत मा बात करुंगा….काहे से कि आप चच्चा की एक टांग खींचोगे और चच्चा आप्की दू टांग खींचेगा.

 

त आज का पहला टिप्पणी लेत हैं हम…यह नायिका है वासकसज्जा !(षोडश नायिका -५) से…

 

My Photo  हिमांशु । Himanshu said...

बिहारी ने इसी नायिका के लिये ही न लिखा था -
"मृग नयनी फरकत दृगन उर उछाल तन फूल
बिन ही पिय आगम उमगि पलटन लगी दुकूल।"
लक्षणों की काव्यात्मक प्रस्तुति लें -
"वही है वासकासज्जा जिसे कुछ मिल गया सुनगुन
कि उसका आज निश्चय आ रहा है प्राण-प्रिय साजन
कभी वह दौड़ कर करती सुसज्जित वसन आभूषण
कभीं वह हर्ष से फिर-फिर सजाती है सुरम्य भवन ।"

12 November 2009 04:37

कार्टून :- ये है सहनशीलता की हद..

 

राज भाटिय़ाNovember 12, 2009 8:41 PM  My Photo

अरे पहले जो पीछे खडी है लेडिज इस से निवट लो फ़िर लेडिज टेलर जेसे सहन शील बनाना.

 

 

 

क्या पता-कल हो न हो!!-एक लघु कथा

 

My Photo  Babli ने कहा…

वाह समीर जी आपने बड़े ही खूबसूरती से ज़िन्दगी की सच्चाई को पेश किया है जो मुझे बेहद पसंद आया! ये बात आपने बिल्कुल सही कहा है कि क्या पता-कल हो न हो!! आखिर ज़िन्दगी का क्या भरोसा, मैं आज खुश रहने के बजाय दुखी हूँ और शायद कल इस दुनिया में न रहूँ ! मेरा तो ये मानना है कि दुःख और सुख लेकर ही इंसान जीते हैं पर दुखों को भूलकर हमेशा हँसते रहना और सबके साथ खुशियाँ बाँटने में जो आनंद प्राप्त होता है उससे बढ़कर कुछ भी नहीं!

11/12/2009 07:16:00 पूर्वाह्न
 

नीरज गोस्वामी ने कहा… My Photo

वाह...आपने बहुत सच्ची और अच्छी बात की है...आपके अपने निराले अंदाज़ में जिसका पूरा ब्लॉग जगत दीवाना है...लिखते रहें यूँ ही...
नीरज
आपकी पोस्ट जैसा ही अपना शेर सुनाता हूँ:-
जब तलक जीना है "नीरज" मुस्कुराते ही रहो
क्या ख़बर हिस्से में अब कितनी बची है जिन्दगी

11/12/2009 12:36:00 अपराह्न

मौन करवट बदलता नहीं

 

दिगम्बर नासवा said...

शब्द कोई गीत बनकर
अधरों पे मचलता नही
सुर सरगम का साज कोई
जाने क्यूँ बजता नहीं.....
DARD BHARI DAASTAAN HAI AAPKI NAZM ..KABHI KBAHI SABR KAA BAANDH TOOT JAATA HAI PAR AANSOO THAM JAATE HAIN AUR SISKIYAAN GHER LETI HAIN UN KE SOONE PAN KO .... GAHRE BHAAV LIYE KAMAAL KI RACHNA HAI ...

12/11/09 12:53 PM

मैकेनिक..

 

संगीता पुरी November 12, 2009 9:47 AM My Photo

ये क्‍या कर रहे हो .. तुमने मुझे तो डरा ही दिया .. नकल करने के लिए अकल चाहिए होती है .. पर तुम तो बंदरों की तरह बिना अकल के नकल करने लगे !!

 

मेरे जग प्रिय रखते मुझको (गीतांजलि का भावानुवाद.)

 

My Photo  गिरिजेश राव says:
November 12, 2009 7:19 PM

हे विनय श्रेष्ठ !
कवि से यह अरज करो
जब अंग्रेजी अनुवाद का भावानुवाद ऐसा हो सकता है !
तो मूल बंगला से हिन्दी प्रवाह
और निर्झर निर्मल हो सकता है।
.. बस अरज है।
बंगला के स्पर्श ने हमें निराला दिया।
शायद ब्लॉगरी दिखा दे एक और निराला !

 

कुछ चीजें कभी नहीं बदलती?

 

रंजना [रंजू भाटिया] उवाच My Photo

इंसानी दिमाग कहाँ से कहाँ ले जाए कौन जाने कोई समझ नहीं पाया ...दिल तो भटकता बंजारा है कब कहाँ घूम जाए और यह सब लिखवा जाए ..

November 12, 2009 11:56 AM

 

पुत्र-वधु के आगमन पर - आज चिरैया आ पहुँची

 

My Photo खुशदीप सहगल said...

सांची कहे तोरे आवन से हमरे,
अंगना में आई बहार भौजी...
लक्ष्मी की सूरत, ममता की मूरत,
लाखों में एक हमार भौजी...
जय हिंद...

November 12, 2009 1:26 PM

 

विज्ञान किन चीजों का निषेध करता है ?

 

श्रीश पाठक 'प्रखर' 12 November, 2009 2:12 PM  My Photo

"किन्तु मेरा मानना ये है कि इस मंच की साथर्कता इसी में है कि हम सब अपने अपने हिस्से के ज्ञान को एक जगह एकत्रित करके उसमें से सत्य ढूंढने का प्रयास करें ।"
सटीक बात लिखी आपने.
तर्क की उम्र एक और अच्छे तर्क के आ जाने तक होती है, सो तर्क के प्रति इतना आग्रही नहीं ही होना चाहिए कि दूसरे अन्य संभवतः सार्थक माध्यम अनछूए रह जाये...
लेख की भाषा में तनिक उद्विग्नता दिखती है..श्रीमान इसकी आवश्यकता नहीं है...वाद-संवाद की भाषा आप नियंत्रित नहीं कर सकते सो बस अपना प्रयास करते जाइये..आपके आलेख मुझे वैज्ञानिक रीति से पराभौतिक विषयों के शोध में निरत लगते हैं और यह रूचिकर भी है...बधाई...

नैनीताल का पहला फिल्म उत्सव

 

My Photo Nirmla KapilaNovember 13, 2009 8:54 PM

ये रिपोर्ट् किसी और ब्लाग पर पढी तो ही मन मे आया कि विनिता कहाँ गयी? आज ढूँढा तो मिली । बस अपनी बेटी से मिलने ही आयी थी कैसी हो? तस्वीरें बहुत सुन्दर हैं। लिखती तो सुन्दर हो ही इस मे कोई शक नहीं बहुत बहुत आशीर्वाद्

 

कृपया राय दीजिए, मुझे क्या करना चाहिए?

 

रंजन said...

काहे लफ़डे में पडते हो भाई.. अपने घर में दाल रोटी मिल हि जायेगी....:)

 

मायूसी ही मायूसी !

 

ललित शर्मा said... My Photo

गोदियाल साब-हम तो मजाक-मजाक खेल रहे थे, वैसे भी हमको भुतों से बहुत डर लगता है-रामसे ब्रदर्स ने तो जीना ही हराम कर दिया था और आप तो सच मे ही बच्चो को डराने लग गये,
ये ठीक नही है-छोटा बच्चा जान के हमको......

November 12, 2009 5:40 AM

 

कैटी भाभी से चुपके चुपके शादी करली? दगाबाज कहीं के!

 

My Photo नीरज गोस्वामी

November 11, 2009 6:55 PM

ताऊ हम होते तो उन लौडों से पूछते की हमारे ताऊ में ऐसा क्या नहीं है जो सलमान में है...देखने में गज़ब के हैं और दिमाग में तो खैर जगत ताऊ हैं ही...काला चश्मा लगा लें तो केटरीना सी दस बेहोश हो कर गिर पड़ें...ये तो केटरीना की किस्मत ख़राब है जो असली हीरा छोड़ के कोयले के टुकड़े पे मरी जा रही है...

इसका मतलब साफ़ है ताऊ की केटरीना के पास चाहे सब कुछ हो लेकिन दिमाग नहीं है...वर्ना ऐसी सलमान के साथ रहने की गलती ना करती और इस आपके गले में वर माला डाल देती बाद में पुरानी ताई आपका जो करती सो करती लेकिन केटरीना की बुद्धि का तो डंका पिट जाता....
नीरज

वाणी गीत My Photo

November 12, 2009 8:01 AM

बुरी बात है ताऊ ...चुपचाप शादी कर ली ...थोड़े ढोल नगाडे तो बजवाने थे ...तभी तो ताई ढंग से सत्कार करती ...लाठी बेलन से ...!!
खूंटा शानदार है ...!!

 

 संजय बेंगाणी said...

कैटरिना शादी कर ले तो हजारों दिल टूटेंगे, बौराये बालक ताऊ पर हमला करेंगे ही. वे निर्दोष है.

November 11, 2009 4:07 PM

 

Blogger Ratan Singh Shekhawat said... My Photo

ताऊ जी ध्यान रखना कहीं यह चर्चा ताई के कानों में न पड़ जाये वरना आपको तो पता है ताई मर्दाबाद के नारे लगाने में विश्वास जो नहीं रखती |
आज तो खूंटा बड़ा मस्त गाडा है |

November 11, 2009 7:31 PM

 

Blogger My Photo ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey said...

बधाई हो। बींधणी तो चमकदार झटकी ताऊ!

November 11, 2009 8:31 PM

 

 

 

खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (111) : रामप्यारी

 

सुनीता शानू said... My Photo

सबको राम-राम। आप सब मुझे लगता है ढँग से देख नही रहे...अरे सामने से कैटरिना कैफ़ आ रही है यह सब उसे ही देख रहे होंगे...

12 November 2009 18:59

 

 

 

  Udan Tashtari said...

पहेली डिस मिस...आयोजक ने जबाब दे दिया..आंदोलन...हाय हाय!!

12 November 2009 18:11

 

प्रेम मे लाठी

 

cmpershad said...

" यह प्यार भी, समझ में नहीं आता कि ऊटपटांग परिस्थितियों में ही क्यों होता है"
ऐसा नहीं है, जब प्रेम बिरादरी के भीतर हो जाता है तो उसे विवाह कहते है और जाति के बाहर हो तो टंटाला...चर्चा का विषय:)

November 12, 2009 7:15 AM

 

सोचते रहते हैं हम..

 

My Photo M VERMA said...

वाह क्या बिम्ब दिया है :
वफा की देगची में ख्वाब का उबलना
बहुत ही सुन्दर

November 12, 2009 6:28 AM

 

अब तंग करके देख...खुशदीप

 

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said... My Photo

खुशदीप भाई, आप चाहें तो गौ-पुराण का आरंभ कर सकते हैं। इतनी सामग्री कल एकत्र हो गई है।
समस्या कुछ और है। पहले बैल काम आते थे खेती में। वहाँ ट्रेक्टर ने उन्हें विस्थापित कर दिया। वे क्या करें। चोरी छुपे कटने जाते हैं। गाय रहेगी तो बैल भी होंगे। अब वे नगरों की सड़कों पर आवारा टहलते हैं। लोग इसी लिए गाय नहीं पालते कि इस ने बछड़ा दिया तो एक दिन कटेगा और पाप लगेगा। डेयरी चलाने वाले भी गाय नहीं पालते, वे बछड़ों का क्या करें? किसी दिन शिवसैनिक धावा बोल कर उन के साथ कुछ भी करते हैं।

डेयरी उद्योग में गाय अनुपयोगी हो जाने से उस की नस्ल भी खराब हो गई और दूध कम देने लगी है। समस्या गाय की नहीं है बछड़े की है। अब बछड़े के लिए कोई रोजगार तलाशा जाए तो गौवंश बचाया जा सकता है। एक तरीका और है वह यह कि बछड़े पैदा ही नहीं हों केवल बछड़ियाँ ही पैदा हों तो भी काम चल सकता है। इस पर रिसर्च की जा सकती है।


खुशदीप भाई दुनिया भावना से नहीं चलती, वह भौतिक सत्यों पर चलती है। भौतिक सत्यों की अनदेखी धरती माता के लिए अभिशाप बनती जा रही है।

November 13, 2009 9:09 AM

 

ठण्ड की शुरुआत और भारी भरकम कपड़े

 


    1. मेरा फोटो

      समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले' says:

      November 13, 2009 at 8:34 am

      कित्ती प्यारी हमारी लवि!!! ठंड आ गई…बाबा रे बाबा!! :)

 

मुक्तिबोध की हर कविता एक आईना है .

 

Anil Pusadkar says:My Photo
November 13, 2009 10:45 AM

मुझे उनके पुत्र दिवाकर मुक्तिबोध के साथ लम्बे समय तक़ काम करने का मौका मिला।उनसे मै हमेशा लड़ता-झगड़ता रहा लेकिन उन्होने मुझे हमेशा छोटे भाई जैसा प्यार दिया।अभी हाल ही मे प्रेस क्लब मे मुक्तिबोध पर एक कार्यक्रम भी हुआ जिसमे अशोक बाजपेई भी शामिल हुये थे।यंहा इप्टा मुक्तिबोध जंयती पर नाट्य स्मारोह भी कर रही है।सुभाष मिश्र लगे हुयें यंहा सांस्कृतिक और कला जगत को सक्रिय बनाये रखने में।


तय करो तुम किस ओर हो,जीवन के इस मूलमंत्र को सब समझते है लेकिन तय करते-करते शायद समय या कह लिजिये उम्र निकल जाती है।मै तो आज तक़ तय ही नही कर पाया हूं कि मै किस ओर हूं।
मुक्तिबोध अमर रहे,मुक्तिबोध सदियों मे एक ही होता है।

 

दूरी

 

My Photo पी.सी.गोदियाल said...

निर्धनता पर अच्छी बातें कहना उनकी फितरत है।
और आचरण में निर्धन से जिनको बिल्कुल नफरत है।
माँगे ताली मंच से ऐसे लगता कोई भिखारी हो,
देख भिखारी यूँ कहते कि यह तो उनकी किस्मत है।
क्या सच्चाई बया कर दी सुमन जी, बहुत सुन्दर !

November 12, 2009 7:53 PM

 

.. ये आग नहीं आसाँ

 

अभिषेक ओझा ने कहा… My Photo

अपने पेशे से जुडी जानकारी देने का सबसे बड़ा लाभ है कि पढने वाले को बिलकुल सही और विस्तृत जानकारी मिलती है सरल भाषा में.

November 13, 2009 2:17 PM

 

 

 

ख़त उसके नाम !

 

My Photo  महफूज़ अली said...

बेशर्मी का आलम ये, शर्म न इनकी नाक में है
किसे लगाए ठोकर रहते,हरवक्त इसी ताक में है,
मार्बल के चेहरे इनके, तारकोल के जैसे सीने है,
तुम गाँव में ही रहो, शहर मत आना पगली,
तुम्हे नहीं मालूम, यहाँ तो पत्थर भी कमीने है !
wah! in panktiyon ne dill ko choo liya.....
bahut hi behtareen abhivyakti.......

November 12, 2009 11:46 PM

 

दिल्ली व्यापार मेले से थोडा दूर लगेगा ब्लोग्गर्स का स्टाल (रविवार ब्लोग बैठकी सूचना )

 

राजीव तनेजा ने कहा… My Photo

नोट कर लिया है बन्धु.... सपत्नीक पधार रहा हूँ

November 13, 2009 9:13 PM

 

 

अऊर अब अंत मा एक ठो टिप्पणी शुकुल जी किये रहे….

चिट्ठाकारी से टिप्पीकारी तक का सफ़र  पर…टिप्पणी ईहां नीचे दे रहे हैं अऊर शुकुल जी ई आपसे वादा रहा कि इसका जवाब एक ठो पूरी पोस्टवा लिख कर ही दूंगा..काहे से कि इसका जवाब बहुते विस्तार से देना पडेगा  अऊर इहां ये पोस्टवा बहुते लंबा हो रहा है..त इंतजार किजिये …जाहे से कि आपको..चच्चा से पंगा लेने मे ही मजा आवत है त ई ही सही…यकीन रखियेगा ..बहुते बढिया से जवाब दूंगा  आपको…आप भी क्या याद रखियेगा कि कि चच्चा टिप्पू सिंह से आपने अऊर आपके चेलवा चपटवा ने पंगा लिया है…ई आपकी टिप्पणी पढ लिजिये…

अनूप शुक्ल ने कहा…

यह जानकर खुशी हुई कि हमारी टिप्पणियां आपको प्रभावित करती हैं। आपने जो लिखा:
..शायद यही कारण था कि जब मैंने टिप्पणियों के संकलन और चर्चा वाले ब्लोग को देखा तो झट से उनसे आग्रह किया कि मुझे भी शामिल करें और मुझे बहुत खुशी और गर्व है कि मैं उस ब्लोग से जुडा ।

मेरा विश्वास है कि टिप्पणियों के संकलन वाला ब्लाग आपका ही है। बाकी के दो सदस्यों के ईमेल पते भी नहीं हैं वहां। मैं गलत साबित हुआ तो मुझे अच्छा ही लगेगा लेकिन फ़िलहाल आपकी लिखने की शैली, जुड़ाव के अंदाज और अन्य बातों से जैसा लगता है वैसा मैंने लिखा।
आप बहुत अच्छा लिखते हैं। लगातार लिखते रहने की आपकी क्षमता की सराहना करता हूं। शुभकामनायें।

November 8, 2009 7:02 PM

अच्छा बच्चा लोग अब चच्चा की तरफ़ से टिप टिप..लिजिये..अऊर ई चर्चा कैसन लगा?  जरुर बताना…..अब चच्चा  की टिप टिप…टिप टिप….

15 comments »

  • हिमांशु । Himanshu said:  

    देर आये दुरुस्त आये । बेहतर टिप्पणी-चर्चा कर डाली । आभार ।

  • ललित शर्मा said:  

    चच्चा गोड़ लागी-सब नीक है ना, आ गये त बढियां हो गया नही त हम कल से ही सोच रहे थे कि एक गुमशुदा दरज करावे,लेकिन हमको आपका फ़ोटुवा नही मिल रहा था, अब बिना फ़ोटुवा के कोई गुमशुदा कैसे करे, हम फ़िर भी चले गये चौकी मा, दरोगा साहेब बोले फ़ोटु बिना हम दरज नही करेगें। अब तनि मेहरबानी करे जब नाती पोते को दुलारने का मन करे और छुट्टी मे जाना पड़े त एक ईश्तिहार ब्लाग पे लगा के जावे, आपका टिपनी चर्चा बढिया रहा, आप भी टिप-टिपाईये और हम भी टीपे जा रहे है।

  • श्रीश पाठक 'प्रखर' said:  

    टिप्पणियों के मार्फ़त एक समृद्ध आशुलेखन की गुंजायश सिर्फ ब्लोगिंग में है; 'टिप्पणियों की चर्चा' इसे एक नया कलेवर और नया आयाम दे देती है और यह भी कि अब तो लिखा हुआ एक भी शब्द जाया नहीं होता..चचा की नज़र को नज़र ना लगे....

  • वाणी गीत said:  

    हमें तो फिक्र हो रही थी ...जन्मदिन मानते टीपू चाचा कहाँ गायब हो गए ...लौटे तो बहुत अच्छी चर्चा साथ ले कर ...आपकी टिपण्णी चर्चा से प्रभावित होकर हमारी टिपण्णी और स्थानों पर भी विमर्श के लिए प्रर्दशित की जा रही है ...क्या कहे ...मजाक का जवाब मजाक में देना भी मजाक हो गया है ...!!

  • Ratan Singh Shekhawat said:  

    चच्चा बढ़िया रही चर्चा :)

  • Udan Tashtari said:  

    बिना बताये न जाया करो चच्चा!! मन घबराने लगता है कि चच्चा हम लोगों को छोड़ी के कहाँ चले गये...न चिट्ठी न संदेश...न जाने कौन सा देस..जहाँ तुम चले गये...गाते गाते गला सूख ही रहा था कि आप आ गये. मन हर्षित हो गया.

    बढ़िया चर्चियाये..आगे से तनि बता कर जाया जाये!!

  • Vivek Rastogi said:  

    टिप्पू चाच टिप्पू चाचा बहुत बढ़िया चर्चा रही...

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    वाह चच्चा, बहुत लाजवाब चर्चा की आपने. बिल्कुल धुंआधार. हमको पक्का यकीन था कि आप कहीं जावोगे तो बता कर जावोगे. पर चच्चा आप तो बिना बताये ही बढ लिये. तमाम आलतू फ़ालतू विचार मन में आते रहे. अब चैन मिला है चच्चा.

    आगे से दो लाईन की एक पोस्ट लिख कर जाना चच्चा. यहां आपके बहुत सारे भतिजे भतीजी हैं जरा उनका भी खयाल रखा करिये.

    रामराम.

  • संगीता पुरी said:  

    टिप्‍प्‍णी चर्चा कई दिन बाद हुई है .. पर बहुत कुछ समेटते हुए किया है .. बढिया !!

  • खुशदीप सहगल said:  

    चच्चा मेरा लौट आया रे,
    चच्चा मेरा लौट आया...
    वो रंगीला, वो छबीला.
    चर्चा में रस लाया रे,
    चच्चा मेरा लौट आया...

    जय हिंद...

  • पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said:  

    हमारा मन भी कईं दिनों से ये सोचकर आशंकित था कि कहीं चच्चा टिप्पूसिंह निकल तो नहीं लिए....
    आपकी सकुशल वापसी के लिए हम सब चिट्ठाकार मिलकर तो एक "चच्चा खोजू अनुष्ठान" शुरू करने वाले थे :)

  • पी.सी.गोदियाल said:  

    वाह ! क्या टिपियाये चचा आप भी , बहुत खूब !!

  • गिरिजेश राव said:  

    हम उपरौछा घूम घाम कहत हैं कि बहुत मजा आया।
    टिप्पू चचा की टिप्पणी चर्चा अद्भुत होत है।
    .. बाकी गहराई में बहते अण्डर करेंट महसूस के डर लागत है।
    हम त बस इहे कहेंगे - चचा चर्चा करते रहो। धन्नवाद।

  • डा० अमर कुमार said:  


    चच्चा हो,
    अबहिन हमहूँ हाँगकाँगै से लउट के आवत अही ।
    ऊहाँ जगह जगह पर पीयरका बोर्ड पर करिया रँग से न जानि ई का लिखा रहा,

    保持市容整洁。अउर 如果土地是你的,你的工作是你们的,让她的心,别人不担心
    पँडिताइन पूछिन, ई का आय ? हम कहा इंडिया चलो, हमरे चच्चा बहुतै ऊँची चीज हैं, जौन रस्ते निकरैं ज्ञान छलकावत जात हैं, उन्हिन ते पूछ लीन जाई ।
    सो, चच्चा एहिका खुलासा कीन जाय, मुला आज केर चर्चा अच्छी ठोंकै पड़े हो । राम राम !

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