नंगई की हदें पार : आईला भईल कायला

10/26/2009 Leave a Comment

चच्चा टिप्पू सिंह की टिप टिप…आज रोहित बचूआ आ धमके सुबह सुबह…कहिन लगे ..चच्चा हम अपना नाम का आगे बेशर्म लगा लूं क्या?  हम कहा..तुहार दिमाग का कोनू पेंच ढीला हुई गवा का?

 

त ऊ बोला नाही..चच्चा ऊ क्या है कि आज कुश खुद से ही कुश “मगरुरवा“ बन गईल है….हम कहा – अरे ऊ त दूसर लोगों का इज्जत खराब करने वाला बेशर्म जाहिल  है…कभी कुंवारे बन कर लोगों को बेवकूफ़ियाता है..त कभी कुछ…रोज त जी टाक मा नया नया ऊल जलूल नाम धरकर आपन बची खुची इज्जत भी खराब करवाय लिया.. पर तू क्यों बेशर्म की पदवी ले रहा है खुद से ही? त रोहित बोला – चच्चा आजकल त ई फ़ैशन हुइ गवा…बेशर्म…मगरुरवा…नालायक… कुंवारा…और भिखारी…यानि जी टाकवा मा टांक दो…जो भी बनना हो..इससे बडा इंप्रेशन बढत है…

 

हम कहा…. अरे ससुर का नाती…तुहार खुपडिया घूम गईल का? दू चपियायेंगे कान के नीचे और गिनती भी नाही गिनेगे…ई कोनू भला घर वाला लरिका लोगन  का काम है का? अरे ऊ तो कभी का आईला आईला करता कायला कायला करने लगा है..  चल सीधे से टिप्पणिया बता अऊर आज का चर्चा शुरु कर….फ़िर हम तोहरे को सलमान खानवा का पिक्चर लंडन ड्रीम्स दिखाने ले चलूंगा… चल शुरु होजा अब….

दान  पर देखिये …..

 

My Photo शरद कोकास said...
24 October, 2009 9:54 PM

भाटिया जी इस सद्विचार पर मेरी एक पूरी कविता है प्रस्तुत कर रहा हूँ
261 खुशी के बारे में


खुशी के बारे में सोचो
कि खुशी क्या है
सुख-सुविधाओं में जीना
ज़िम्मेदारियों से मुक्त होना
जीवन में दुख व संघर्ष का न होना
तालियाँ बजा बजा कर भजन गाना
आँखें मून्दकर प्रसाद खाना
बच्चों से रटा हुआ पहाड़ा सुनना
हर इतवार सिनेमा देखना
अपनी हैसियत पर इतराना
या फिर
खुशी के बारे मे न सोचते हुए
किसी में जीने की ताकत भर देना
किसी बुज़ुर्ग से दो बातें कर लेना
रोते हुए बच्चे को चुप कराना
बेसहारा का सहारा बन जाना
गोया कि इस तरह मिलीं खुशियाँ
दूसरों में बाँट देना
वह भी सोचो
यह भी सोचो
खुशी के बारे में
एक बार फिर सोचो ।

शरद कोकास

My Photo

अविनाश वाचस्पति

said...

 

25 October, 2009 6:51 AM

@ सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
कुछ सुखी ही होते हैं
दूसरों को दुखी देखकर
उन्‍हीं की बहुतायत है
सिर्फ ब्‍लॉगिंग में ही नहीं
पूरे समाज में।


आप हतप्रभ क्‍यों है
खुशी बाद में न सही
पहले तो खूब बंटी
हमारी तो जेब
खुशी से खूब भरी।

बाद वाले तो ले उड़े
फुलझड़ी
अब जला रहे हैं
चमक से खुश हैं
पर शिकायत है
इससे धुंआ निकलता है
पर्यावरण प्रदूषित होता है
इसे ही कहते हैं
दूसरे को दुखी करने का प्रयास
और इसी में खुशी का अप्रतिम विश्‍वास
जिसका है रहने दो
जो जिस हाल में है
उसे उसी में बंद रहने दो
चंद लोगों को चंद ही रहने दो
खुशी का चंदा मत दो।

 

अब आगे चलिये जरा…

 

राष्ट्रीय संगोष्टी : हिन्दी ब्लागिरी के इतिहास का सब से बड़ा आयोजन

 

इलाहाबाद से 'इ' गायब (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )  चिट्ठाचर्चा के अलावा अतीत के झरोखे से और नजरें इनायत पढना आपको बहुते अच्छा लगेगा. जरुर पढियेगा.

 

अब फिकर नॉट, ब्लॉगिंग पर कब्जा रहेगा चिरकुटों का….पर देखिये..

 

विवेक सिंह Says:मेरा फोटो


 


अक्टूबर 26th, 2009 at 12:39 सायं

एक चिरकुट खेत में लैपटॉप लेकर खेत में शौच के लिए गया । जब तालाब पर पहुँचा तो जैसे ही पानी के लिए हाथ बढ़ाता मेंढक बोलता टर्र.., चिरकुट तुरंत लैपटॉप खोलकर बैठ गया, ब्लॉग पर लिखा :

टर्र टर्र क्यों कर रहा,
हमें नहीं किसी का डर,
धोने दे तो धोने दे,
नहीं जाय धोयेंगे घर

My Photoरवि Says:
अक्टूबर 26th, 2009 at 12:24 सायं

इ बात तो हमहूं पिछले सौ सालों से कहते आ रहे हैं. पण जब चाहे कोई अज्ञानी “मठाधीश मठाधीश” चिल्लाता चला आता है और आधी जनता हुआँ हुआँ करने लग जाती है…:)

लो बोलो रतलामी साहब सौ साल से तो ई बात ही कह रहे हैं त इनकी उम्र बताई जाये…ये आज की पहेली है.

 

अब तनि अऊर बढा जाये…  इनको टिप्पू चच्चा की अदालत में अब साधू होने का मन है….

 

Arvind Mishra ने कहा… My Photo

बुलावा तो आपको मिला था विवेक मगर आप कोई
इम्तहान वगैरा दे रहे थे न ? सो नहीं आये और अब इसका भी लाभ ले
ले रहे हैं ! बिग ब्रदर इस वाचिंग यू !

October 25, 2009 10:43 PM

My Photoखुशदीप सहगल ने कहा…

विवेक भाई,
मेरी जान-पहचान का खेमा पहलवान इन दिनों खाली बैठा है...कहो तो आपके पास भेजूं...अगर कोई आपको निमंत्रण भेजे तो ठीक...नहीं भेजे तो खेमा पहलवान है न...अपने आप जाकर खबर ले लेगा...
जय हिंद...

October 26, 2009 12:18 AM

 

ब्लागर उवाच -प्रयाग की चिट्ठाकारिता संगोष्ठी

 

Meenu Khare said... My Photo

कोटिश: धन्यवाद अरविन्द जी. बहुत अच्छी रिपोर्टिंग है.आपने मेरी प्रस्तुति के कंटेंट को हूबहू कोट किया है इसके लिए भी आभारी हूँ वर्ना एक ब्लॉग (गाहे-बगाहे) पर न सिर्फ मेरी प्रस्तुति के कंटेंट को मिसकोट किया गया बल्कि मेरे नाम के आगे वो टॉपिक लिख कर मेरी बाक़ायदा आलोचना भी की गई जिस टॉपिक पर मैं बोली ही नहीं. मैने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दुरुपयोग पर प्रस्तुति की थी परंतु इस स्वतंत्रता के दुरुपयोग का शिकार सेमिनार से लौटते ही मैं स्वयँ हो जाऊँगी इसकी आशा नही थी.
वस्तुनिष्ठ रिपोर्टिंग के लिए एक बार फिर आभार.

25 October 2009 10:04

My Photoगिरिजेश राव said...

@ ब्लागरों ने बेलौस कई बातें ऐसी कीं जो आगे के विमर्शों की पूर्व पीठिका बन गए हैं ! - अमृत वचन।
तत्त्वदर्शी प्रभु! आप का व्यक्ति + तत्त्व दर्शन विलोड़ित कर गया। बेवाकी, खुशमिजाजी और कहनी खरी खरी! आप से अति प्रभावित तो पहले ही था लेकिन मिलने के बाद लगा कि शायद मेरा बड़ा भाई जीवित बच गया होता तो . . सेंटी हो रहा हूँ। सिद्धांतहीनता है - थोड़ी औपचारिकता तो बनी रहनी चाहिए।
________________________________
आयोजकों की थोड़ी तारीफ कर दीजिए न ।

25 October 2009 10:38

इसी पोस्टवा पर दू ठो कमेंटवा अऊर देखा जाये तनि….

Udan Tashtari said... My Photo

बड़ी पैनी निगाह रखने का विचार था इस आयोजन पर...लगता है मोतिया बिन्द उतर आया है मुझे...धुंधलका छा गया है इतनी बातें साफ साफ जानकर...वरना तो काला चश्मा पहनना समझाईश है ऐसी हालातों में. :)

25 October 2009 19:49

Cyril Gupta said...

ब्लागवाणी का कोड लिखते समय विश्वसनीय कोड ही लिखा था मैंने. बहरहाल रवि जी ने समझ और रिसर्च करके ही कहा होगा. अगर वो बतायेंगे तो यह भी जान लेंगे कि विश्वसनीय क्यों नहीं है.
बहरहाल ब्लागवाणी के आंकड़े आपके ब्लाग पर सारे आने वालों की जानकारी नहीं होते. वह सिर्फ उनके बारे में हैं जो ब्लागवाणी से आपके पास गये. ब्लागवाणी कोई स्टेट क्लैक्टर नहीं है. वैसे क्या यह समझना भी इतना मुश्किल था?

26 October 2009 02:06

 

किताबों की दुनिया – 18

 

Nirmla Kapila said... My Photo

नीरज जी आपने इस पुस्तक की जानकारी दे कर हम पर बहुत बडा उपकार किया है मंगवाती हू इसे उनकी शायरी के बारे मे मैं तो क्या कह सकती हूँ सूरज को दीपक कैन दिखाये? मगर उनकी एक बात मैं बहुत अच्छी तरह जानती हूँ कि वो एक नेक दिल सुहृदय और बहुत ही अच्छे इन्सान हैं और मैं उन जैसा बडा भाई पा कर दुनिया की सब से खुशनसीब् बहन बन गयी हू। दूसरों को प्रोत्साहित करना और बहुत सहनशीलता से सिखाना कोई उन से सीखे।सब से बडी बात उनका बडप्पन हैकि वो श्रेय खुद को नहीं देने देते मुझ जैसी अल्पग्य को भी बडी मेहनत से सिखाते हैं। वो गज़ल ही नहीं कविता कहानी भी बहुत अच्छी लिखते हैं। उनकी कलम को और उन की इन्सानियत को मेरा सलाम है। अभिभूत हूँ उनकी काबलियत पर । भगवान उनको चिरायू और सुख समृद्धि दे ।उनको किताब के लिये बहुत बहुत बधाई और आपका धन्यवाद।

October 26, 2009 5:34 PM

 

अब वह मरीज कभी दरवाजा खटखटाने नहीं आएगा।

 

My Photoकंचन सिंह चौहान said...

ये क्या पढ़ाया सुशील जी आज....! आँखें नम हो गईं...! बहुत नज़दीक थी ये मेरे अपने दिल के...!!
तब से लेकर आज 11 अप्रैल की 1977 रात तक उसे अनवरत सेती रही और अंतत: वह चला गया। मैं किससे कहूँ कि इतने वर्षों की इस सेवा ने मुझे क्या दिया? जब तक जीवित हूँ, उनकी याद सेती रहूँगी- दो कमरों का यह फ्लैट , दीवारों पर लगी उनकी तस्वीरें, उनके दैनिक उपयोग के सामान और पुस्तकें...... यही सब छोड़ कर तो गए हैं वह - पिछले तैंतीस वर्षों की भुलाई न भूलने वाली यादें। आज भी लोग आते है। दरवाजे की कुण्डी खटकती है लगता है शायद वह ही हों।
"के?".............. पूछती हूँ।

इन शब्दों का मन पर कहाँ असर हुआ, ये बताने के लिये शब्द किससे उधार माँगू...???????

October 26, 2009 12:21 PM

 

कार्टून:- बाम्बे की बिल्ली उड़ीसा पहुंची

 

राज भाटिय़ा,  October 26, 2009 2:26 PMMy Photo

कार्टून बहुत सुंदर लगा, लेकिन हमारे नताओ कोऎसी बेकार की बातो के अलावा कोई ओर काम नही, जिस से जनता का भला हो...

 

"किस्मत का उपहास"

 

My Photo महेन्द्र मिश्र said...

बहुत भावुक कर देने वाली पोस्ट. रचना काफी दिनों बाद पढ़ने मिली . आभार.

26/10/09 9:37 AM

 dandavat

 
                                                                                                 कायलियत के कायल- कैसे कैसे घायल?!!

 

My PhotoRatan Singh Shekhawat ने कहा…

अरे भाई साहब ! आपने समीर जी के लेखन और उनके द्वारा दिलखोलकर टिप्पणियाँ बाँटने के बारे तो सुना होगा |
अरे भाई इसीलिए तो मुझ सहित सारा हिंदी ब्लॉगजगत समीर जी कायल है :)

10/26/2009 06:44:00 पूर्वाह्न

M VERMA ने कहा…

जी हा! कभी कभी हम जिससे घायल होते है, उसी के कायल हो My Photoजाते हैं. काबिलियत और कायिलियत समानांतर नहीं हैं.
तीर फेंका था उन्होंने तो मार डालने को
मुझको तो उनकी इस अदा पर मोहब्बत हो गया.

10/26/2009 07:09:00 पूर्वाह्न

My Photo Mishra Pankaj ने कहा…

सही कहा आपने , कायल तो लोग इतने हो जाते है कि भरे बाज़ार किसी बेसुरे गाने वाले को भी बहुत बड़ा गायक बता देते है ....कायल होना और कायल करवाना एक कला है भाई

10/26/2009 07:26:00 पूर्वाह्न

My Photo

mahashakti ने कहा…

कायल होने के चक्‍कत में आप घायल भी हो सकते है जिनके आप कायल है उनसे थोड़ा दूर ही रहे :)

10/26/2009 08:00:00 पूर्वाह्न

My Photo Arvind Mishra ने कहा…

मैं तो आपके ब्लागिरी -दादागिरी बनाम गांधीगीरी का पहले से मुरीद ही था अब इस पोस्ट को पढने के बाद पूरी तौर पर कायल हो गया हूँ और हाँ आपकी फरमाईश तो कब की पूरी हो गयी और आपने न तो देखा भाला है और न ही शुक्रिया मिली अब तक !

10/26/2009 07:29:00 पूर्वाह्न

ताऊ रामपुरिया ने कहा… My Photo

वाह क्या खूब लिखा है आज तो. कायलियत कभी कभी घायलियत मे भी तब्दील होती देखी गई है.:)
"कायल कि गति कायल जाने"
संतो जब अक्ल हुई बोरानी...
रामराम.

10/26/2009 10:36:00 पूर्वाह्न

My Photo राजेश स्वार्थी ने कहा…

ये बेहिसाब कायल तो दंडवत ही हो गये. हम समझ गये आपका इशारा किस पंडित को नाप रहा है इस फोटो से.

10/26/2009 07:31:00 पूर्वाह्न

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey ने कहा…My Photo

वाह, शब्द तो फुदक रहे हैं - कायल, कायलता, कायलमान, कायलीय, कायलत्व, कायला (आयला की तर्ज पर)...!
फिलहाल तो मैं कायलिंग (साइकलिंग की तर्ज पर) सीख रहा हूं! :)

10/26/2009 10:23:00 पूर्वाह्न

 

इलाहाबाद से 'इ' गायब (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

 

रावेंद्रकुमार रवि said... @ October 26, 2009 7:24 PM My Photo

अब तक यहाँ हुई चर्चाओं में से एक अविस्मरणीय चर्चा,
जिसमें सभी की भावनाओं का ध्यान रखा गया है!
शास्त्री जी, आपके लेखन की एक अलग ही शैली
यहाँ भी दिखाई दे रही है,
जिसमें रोचकता और प्रवाह दोनों का आनंद मिल रहा है!
चिट्ठों के चयन में परदर्शिता की झलक
साफ-साफ दृष्टिगोचर हो रही है!

 

घट घट में पंछी बोलता-वीणा सहस्रबुधे-येसुदास

 

My Photo pragya said...

ज़िन्दगी को सवारना होगा दिल में सूरज उतरना होगा . वाह .. पारुल सुखद है येसुदास को सुनना
thanx a lot

OCTOBER 26, 2009 5:31 AM

 

मैनेजर ताऊ और तीन लिफाफे

 

  1. ललित शर्मा Says:My Photo

    Posted on October 26, 2009 8:17 AM

  2. वाह ताउ जी की बात निराली है
    इनके पास हर ताळे की ताळी है
    म्हारा ताऊ किसी ते कम नही सै
    सारी दुनिया इसकी देक्खी भाळी है
    जय हो रतन सिंग जी

 

प्रभु मुझे शकुनी सा मामा देना

 

My Photo वाणी गीत said...

शकुनी और कैकेयी का प्रेम व् निष्ठा जरुर एक उदहारण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है ...मगर ये दोनों चरित्र आदर्श के रूप स्वीकारे जाने योग्य तो बिलकुल भी नहीं है ....
आपकी इस बात से सहमत हूँ की पूरी महाभारत ही छल प्रपंच, पाखंड, दुष्टता की मिसाल है मगर हम ये क्यों भूले की इन अवगुणों के कारण ही महाभारत रचा गया और एक उन्नत सभ्यता का अवसान हुआ ... !!

October 25, 2009 6:31 PM

 

निज भाग्य बड़ाई

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` उवाच  My Photo 

बधाई भेजे देते हैं
साथ साथ ,
आपकी पहलीवाली गर्ल फ्रेंड से
परिचय भी हो गया :)
स स्नेह,
- लावण्या

October 26, 2009 6:18 AM

 

नंगई की हदें पार करते सीरियल और बेशर्मी से उन्हे प्रमोट करते न्यूज़ चैनल

 

बी एस पाबला said... My Photo

दूसरों की उतारने में तो बहुत मज़ा आता है खी खी भी दिखाई जाती है।
खुद की उतरे तो आँसू टपकाओ, वह भी दिखाए जाएँगे।
जनता को व्यस्त रखो, यह एक सूत्री कार्यक्रम है शासकों का।
जनता भी वह देखती है जो वह अपने साथ होता नहीं देखना चाहती।
बी एस पाबला

OCTOBER 26, 2009 9:01 AM

 

अर्थ का अनर्थ...खुशदीप

My Photo जी.के. अवधिया said...

बहुत ही सुन्दर एवं निर्मल हास्य!
इसे पढ़ाने के लिए शिवम् जी और खुशदीप जो को धन्यवाद!!
एक सच्ची घटना याद आ रही है स्पेलिंग की गलती वाली। मेरे स्व. पिताजी एक बार विद्यार्थियों की अंग्रेजी की उत्तर पुस्तिकाएँ जाँच रहे थे। एक विद्यार्थी ने अपनी उत्तरपुस्तिका में GANDHI को त्रुटिवश GADHI लिखा था। अब क्या पढ़ा जाये इसे?

October 26, 2009 9:33 AM

राजीव तनेजा said... My Photo

आपने सही कहा...अर्थ का अनर्थ होने में देर नहीं लगती ...
आप नीचे के दोनों वाक्यों को ही देखिए..
पकड़ो...मत जाने दो
पकड़ो मत...जाने दो
आपके अन्दाज़े ब्याँ ने पुरानी शराब को नई बोतल में बखूबी डाल के पेश किया है

October 26, 2009 1:30 AM

 

इलाहाबाद से 'इ' गायब, भाग –1 पर आप पढ सकते हैं असली असलियत ..सारी बात समझ आ जायेगी.

 

My Photo P.N. Subramanian ने कहा…

लाहाबाद (इ गायब कर) के आयोजन पर बहुत कुछ पढ़ा. बैठे ठाले समझने की कोशिश की. आपके आलेख ने मस्त कर दिया. आभार.

October 25, 2009 10:17 PM

 

अब साधू होने का मन है 

 पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा… My Photo

कमाल है! हमें तो यही समझ नहीं आ रहा है कि ससुरा ये कैसा ब्लागर सम्मेलन था...जिसमें सम्मिलित होने वाला भी दुखी ओर जो सम्मिलित नहीं हो पाए या नहीं किए गए..वो भी दुखी !!

October 26, 2009 12:29 AM

 

त अब आज का चर्चा पूरी भईल…आजकल टिप्पणि ज्यादा दिखत नाही सो रोज टिप्पणी चर्चा कहां से करें? अऊर हमको जो मेल आप लोग भेजत हैं ऊ मा सही लिंक दिया किजिये जिससे हम तुरंते ई वहां पहुंचूंगा..एक तो ब्लागर प्रोफ़ाईल लिंक आया है अऊर ऊ भी गलत…आप बेफ़िक्र रहीये..आपका मेल..का हम किसी हालत मे जिक्र नाही करुंगा…चच्चा का अदालत मा गलत काम नाही होगा…चच्चा को आप बेखौफ़ होकर मेल भेजिये…

अब चच्चा खी टिप टिप लिजिये..अऊर हम अऊर रोहितवा अब लंडन ड्रीम्स देखबे जा रहे हैं..नाही त ऊ सलमानवा नाराज हो जायेगा भाई..समझा किजिये ना.

28 comments »

  • ब्लॉ.ललित शर्मा said:  

    चच्चा टिपणी चर्चा का यही जवाब है
    आपका कोई जवाब नही,लाजवाब है
    जय होवे तोहार

  • राजीव तनेजा said:  

    बड़ी ही मस्त रही आपकी टिप्पणी चर्चा

  • Mishra Pankaj said:  

    टिप्पू चच्चा की जय ....चच्चा आपने बड़ा उपकार किया ये बताकर इलाहाबाद से 'इ' गायब (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की ) चिट्ठाचर्चा के अलावा अतीत के झरोखे से और नजरें इनायत पढना आपको बहुते अच्छा लगेगा. जरुर पढियेगा.

  • Mishra Pankaj said:  

    का बात है चच्चा इतनी अन्दर की खबर कहा से लाते है कि कौन कहा किस नाम से कमेन्ट किया है ?

  • Meenu Khare said:  

    हमारी टिप्पणी छाप कर बड़ी धीरज बँधाई चच्चा आपने वर्ना गाहे-बगाहे ने हमारा ऐसा यशोगान किया था जो हमें आज तक नसीब नहीं हुआ.आशा है सदी के महान रिपोर्टर इस पोस्ट को ज़रूर पढ लेंगे.और हाँ आपके साथ अरविन्द जी को भी धन्यवाद जो इतने सीनियर होकर भी हर शब्द को ध्यान से सुन/समझ कर ही लिखने की हिम्मत कर पाते हैं.

  • Mishra Pankaj said:  

    चच्चा लौटे पर फिलमवा का जीकर जरूर करिह नाही ता हम नाराज होई जाइब

  • Mishra Pankaj said:  

    चच्चा लौटे पर फिलमवा का जीकर जरूर करिह नाही ता हम नाराज होई जाइब

  • Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said:  

    लगता है कि आपने जरूर गुप्तचर विधा सीखी हुई है...तभी तो झट से पता लग जाता है कि कौन कहाँ किस नाम से कमेंट कर रहा है,कौन कुँवारा बनकर किसी को बेवकूफ बना रहा है,कौन क्या कर रहा है...इत्यादि इत्यादि :)

  • Udan Tashtari said:  

    पूरे ब्लॉगजगत की छंटी छंटाई टिप्पणियाँ ले आये, चच्चा! बड़ा लम्बा फेरा लिये हो..जय हो!! मजा आ गया...मेहनत को सलाम!!

  • Mishra Pankaj said:  

    चाचा का गुप्तचर एजेंसी है :)

  • शरद कोकास said:  

    बहुत मिहनत कर रहे चच्चा .. लगे रहो। जय जय ।

  • Arvind Mishra said:  

    कवन तकनीक अपनाते हैं चाचा की वही नजरिया पहुँचती है जहाँ पहुंचनी चाहिए ! अब ई टिप्पणी का अगली टिप टिप में नहीं दे सकते का ? आखिर इहौ त एक टिप्पणी है !

  • Dr. Shreesh K. Pathak said:  

    चाचा कब्बो ना बुढाबा तू...

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    चच्चा का इकबाल बुलंद रहे. गजब का काम करते हो चच्चा. सारा निचोड ला कर धर देते हैं चच्चा आप तो. जय हो चच्चा टिप्पू सिंह की.

    रामराम.

  • मिस. रामप्यारी said:  

    चच्चा जी नमस्ते, आपको मैने मेल भेजी थी पर आप तो ताऊजी डाट काम पर आये ही नही. प्लिज चच्चा आप वहां से भी टिप्पणियां उटाने की कृपा करें. आपको मेल मे लिंक दे दिया है. यहां नीचे भी दे रही हूं.

    राम की प्यारी रामप्यारी.

    http://www.taauji.com

  • Gyan Darpan said:  

    बढ़िया टिप्पणियां समेटी है चच्चा !

  • दर्पण साह said:  

    wow..........


    hum jaante hain bhai ki kitni mehnat ka kaam hai ye.....

    ..lage rahiye !!
    Aapke saath hamesha hain !!
    Kai baat tippaniya apne aap main kriti hoti hain....
    aur unka samman aapke blog se hote dekhkar accha lag raha hai...

  • दर्पण साह said:  

    aapka templetiya satyagarha....
    ...ek vote hamara bhi !!
    100%

  • बाबा निठ्ठल्लानंद जी said:  

    आपकी यह चर्चा तो नितांत रोचकता पुर्ण होती जा जारही है। कमाल का सम्कलन है। असल मे लंबी उबाऊ पोस्ट पढने की बजाये आपकी संकलित चंद टिप्पणियां पढकर ही सारा सार समझ आजाता है और रोचकता भी बनी रहती।

  • बाबा निठ्ठल्लानंद जी said:  

    और चच्चा आपके सत्याग्रह के समर्थन मे एक वोट हमारा भी अर्पण है १०० % वाला। लगे रहिये चच्चाजी।

    चच्चा टिप्पू सिंह जि की जय हो।

  • Khushdeep Sehgal said:  

    ब्लॉगिंग में बदमाशी करने वाले अब शरीफ बच्चे बन कर रहेंगे...क्यों...क्यों ताऊ के लठ्ठ की मदद करने के लिए चच्चा टिप्पू भी लठिया लेकर जो आ गया है...

    जय हिंद...

  • Mishra Pankaj said:  

    चच्चा हम ता ओटवा पाहिले हे दे दिहले बानी अब का देई? चच्चा एक काम करी ना .......चली बाद में बताइब

  • "सांड" बनारसी said:  

    चच्चा ये बताइये आपको कहा से पता चला की कुशवा अब मगरूर लिखे है ?.कही फिरासतिया के यहाँ तो नहीं ना शेखी बघारत रहा ?

  • "सांड" बनारसी said:  

    मेरे तरफ से भी १००% सत्याग्रह सफल है
    जय हो टिप्पू चच्चा की

  • Riya Sharma said:  

    चच्चा आजकल त ई फ़ैशन हुइ गवा…बेशर्म…मगरुरवा…नालायक… कुंवारा…और भिखारी…यानि जी टाकवा मा टांक दो…जो भी बनना हो..इससे बडा इंप्रेशन बढत है…

    हाहा.....इम्प्रेस्सेड चच्चा ..सौ फीसदी...:))

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