आये थे सम्मलेन में लोटन लगे लोट्वास,:इलाहाबाद से लौट कर

10/24/2009 Leave a Comment

सबसे पहले तो चच्चा की तरफ़ से टिप तिप ..टिप टिप संभालो जी। अब आप ये पूछेंगे कि चच्चा दू दिन कहां गायब हो गये थे? त हम अप लोगन का पूछने से पहले ही बता देता हूं कि हम इलाहाबाद कुंभ मा गये रहिन….अब आप फ़िर पूछेंगे कि इ कुंभ अभी कहां से आ टपका? त भाई इ  ब्लागर कुंभ रहा… अब हम इस पर का रिपोर्ट करें? पल छिन की रिपोर्टवा त आपको मिल ही रहा है..यानि लाइव टेलीकास्टवा त चल ही रहा था न? कैसन सब बडकवा छुटकवा लोग इतरा रहा था ऊ सब त आपको मालुम चल ही गया होगा ना?

 

अऊर यूं भी ई हमारा काम तो नही है…अब ऊंहां का बारे मा हमार का विचार बतावें आपको?  उहां भी येही ई सब कुच्छौ था जो हियां रोज होबे करता है….एक ठो टिप्पणी देखा जाये फ़िर आप ही ब्लागर कुंभ का हाल चाल समझ ल्यो…चावल की हांडी मा एक ठो चावल ही देखा जात है…..त ई चावल रुपी टिप्पणि देखा जाये

 

लोटपोट पर सुबह -सुबह की चर्चा

 

My Photoज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey Says:

Posted on October 24, 2009 1:32 PM

कोई मारपीट हुई अबतक? कोई वारदात? कोई जूतमपैजार?
ढंग से लगता संचालन हो नहीं रहा है! :-)

 

एक ठो अऊर टिप्पणियां इसी पोस्टवा से ….

 

कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee Says:     kavitaji-Pic 1

Posted on October 24, 2009 2:39 PM

अच्छा लग रहा है, ब्लॉग संगोष्ठी का अद्यतन प्रसारण|
और हाँ, ऐसा नहीं है कि नामवर जी जानते नहीं हों की ब्लॉग को चिट्ठा नाम वर्धा वि. वि. ने नहीं दिया | वे जानते होंगे क्योंकि यह हर कोई आमौ-ख़ास जानता है | परन्तु नामवर जी का यही तरीका है कि सारे प्रकरण में विवाद की एक चिंगारी छेड़ दो और चर्चा में बने रहो| सबका ध्यानाकर्षण !!


ब्लॉग जगत में आप नहीं देखते हैं कि लोग-बाग़ भी यही करने की राह पर चल निकले हैं| चर्चा (चिट्ठाचर्चा सहित दूसरी भी चर्चाएँ ) में आने के लिए लोग कितने बेताब रहते हैं ?? पूरा इतिहास खंगाल लीजिए, आप तो ब्लॉग-इतिहास के सर्वमान्य इतिहासकार हैं, हमसे बेहतर जानते हैं| टंकी पुराण से गाली पुराण तक ......
आधुनिक साहित्य-समाज में ऐसे ही तो केन्द्रीकरण { :-) } होता है |

विनीत की रपट, फुरसतिया का फुरसतनामा, एकेडेमी की आधिकारिक जानकारी और विस्फोट का समाचार सभी बाँचे गए हैं.
सभी को धन्यवाद|
पुनश्च :
--------
और हाँ आपको बधाई ! कल चिट्ठाचर्चा का पेजव्यू आँकड़ा पुराने सब रेकोर्ड तोड़ कर १२२६ पहुँच गया| कोई मिठाई शिठाई बाँटीं जानी चाहिए| हमें भेजने के लिए ८ दिन का मार्जिन लेकर लम्बे समय तक चलने वाली मिठाई (जैसे - काजू बर्फी आदि )
डाक से भिजवाने की व्यवस्था कीजिए और सिद्धार्थ को भी कहला दीजिए | हम मुँह मीठा करने का इंतज़ार करते जा रहे हैं |

 

अऊर अब एक ठो पोस्टवा पर…कमेंटवा देखा जाये….

दूसरे दिन का पहला सत्र शुरू

 

              विवेक सिंह Says:

Posted on October 24, 2009 6:27 PM

लगता है इलाहाबाद में कुछ लोगों को पर्याप्त भाव नहीं मिल पाया,
सम्मेलन स्तरहीन नहीं रहा होगा,
कुछ लोग ऊपर के स्तर पर जा बैठे होंगे तो कुछ को निचले स्तर पर धकेल दिया गया होगा,
यह विवेक सिंह की परिकल्पना है,
जैसे आवोगाद्रो की परिकल्पना बाद में सत्य पायी गयी, वैसे ही हो सकता है हमारी परिकल्पना भी सत्य हो :)

ब्लागर सम्मेलन प्रेमी Says:

Posted on October 24, 2009 6:49 PM

”अरविन्दजी ने अपने ब्लाग का प्रचार किया केवल कि हमारे साइंस ब्लाग में ये किया जा रहा है, वो किया जा रहा है।”
Dr. Arvind Misra Ji के द्वारा सामाजिक मन्च से दिये गये उदबोधन को प्रचार बता कर चर्चाकार उनकी, चर्चा के इस सामाजिक मन्च से, मानहानि कर रहे हैं. कोई व्यक्तिगत कारणवश ऐसा किया जाना उचित नहीं लगता. चर्चाकार को सामाजिक मन्च की मर्यादा एवं Dr. A. Mishra के सम्मान का ख्याल रखना चाहिये. यह मन्च व्यक्तिगत भड़ास निकालने के लिये नहीं प्रयुक्त किया जाना चाहिये.

अब आगे बढा जाये….

पड़ चुके हैं संतों के चरण प्रयाग में ...

 

My Photoताऊ रामपुरिया said...

टांग खींचना और खिंचवाना एक कला है जो हमारे भारतीय खेल कब्बड्डी का मुख्य हिस्सा है. इस लिये टांग खींचे जाने की चिंता मत किजिये. टांगे खींच खांचकर ही तो कबड्डी के खेल की रोचकता बरकरार रह पाती है.
कार्यक्रम की सफ़लता के लिये आपको और आयोजकों को हार्दिक शुभकामनाएं.
वैसे आपका यह कथन सही है कि अगर पता होता या बुलाये जाते तो हम भी आते.:)
रामराम.

वाणी गीत said... My Photo

जंह जंह पाँव पड़े संतान के तंह तंह बंटाधार ....
दे देते हैं हम भी शुभकामनाएँ ...!!

23 October 2009 03:00
 

अब ई त आप समझ ही गये होंगे कि ऊहां सम्मेलन मे क्या क्या हुआ? कैसे सब अपने अपनो का फ़ोटो मोटो छापा गया? हम भी ऊहां रहे पर हमका चाय जलेबिया नाही ना मिला..पर सच बातायें ..हम खा भी लेता चाय अऊर जलेबियां..पर ऊ का है ना कि चच्चा को जरा सूगर से तनि एलर्जी है ..ससुर सूगर बढा हुआ है ना ..त हम सूगर अऊर इन सूगर बाज लोगन से दूरी ही रखत हैं…आप लोग समझ ल्यो..हमरा ज्यादा मुंह ना खुलवाओ…वर्ना फ़िर कहोगे कि चच्चा तुम भी…… अऊर नाही त क्या? रिपोर्टिंग का नाम पर कैसन लोगन को फ़िर से बेइज्जत किया गवा कि नाही?

हां तो अब आगे बढा जाये…



मेरे सभी दोस्तों को (To All my friends…)

 

My Photoपी.सी.गोदियाल said...

Interesting !!
खैर, I don't know whether I fall under your "Friends" Category or not लेकिन दो और शब्दों का इजाफा करने की अनुमति चाहूंगा :
If you have any question in your mind, please feel free to contact me- फालतू बैठा हूँ, दिमाग चाटने की सूझे तो चाट लियो !
Looking forward to receiving your reply soon-
साले अगर फटाफट जबाब भेज देगा तो तेरा कुछ घिस नहीं जाएगा

 
 

My Photoकाजल कुमार Kajal Kumar said...

देखो भई बातें 4 हैं:-
1. अगर आज कोई हजामत की दुकान भी खोलता है तो ठुमका लगाने के लिए बंबइया फिल्मों से अपनी जेब के मुताबिक़ किसी न किसी को नचा छोड़ता है, वर्ना नाचने और बाल-कटाई में कोई आपसी रिश्ता है क्या?
3. इन नचनियों को कहीं भी नाचने से कोई परहेज़ नहीं, उनका तो धंधा ही ठुमकना है, कोई बुला के तो देखो, बस नोट दिखाना भर ही काफी है..
2. बिना नचनियों के छपाईगीर भी उधर नहीं झांकते जिस दुकान की रिब्बन-कटाई पर नचनिये न आए हों और,
4. मकान मालिक का कुक्कुर भी आज के ज़माने में 'सर जी' कहलाता है. भाई, मकान मालिक के तंबू में मुजरा देखना हो तो, बंबू तो सहना ही होगा न.

 

गब्बर और सांभा हुये परेशान!

 

My PhotoMishra Pankaj said...

गब्बल छाम्भा अब पुले ब्लॉग जगत को तोतला बालने पर अमादा है क्या ..........

October 24, 2009 10:45 AM

 

गूगल, यूं हिंदुस्तानियों के साथ खिलवाड़ न करो

My Photo

richa said...

आज गूगल के बिना इन्टरनेट के बारे में सोचना भी अटपटा सा लगता है... पर इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है की वो हमारे देश के नक्शे के साथ इस तरह से खिलवाड़ करे और हमारी भावनाओं को आहात करे... गूगल के बारे में आपने इस लेख के ज़रिये उस पर पूरी तरह से आश्रित हो चुके हम सब लोगों को इस सच से अवगत कराया इसके लिये आपका हार्दिक धन्यवाद... उम्मीद करते हैं गूगल अपनी इस भूल को जल्द ही सुधारेगा.

 

का्र्टून:- बाप रे.. बहुत तेज़ चैनल..

My Photoसंजय बेंगाणीOctober 24, 2009 10:40 AM

चोर चोर मौसेरे भाई है. एक करता है, दुसरा दिखाता है.

 

रामप्यारी ने तोडी रिकार्ड ,टिप्पणी हुआ 300 के पार (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

 

Udan Tashtari said... @ October 24, 2009 7:06 AMMy Photo

जबरदस्त से भी जबरदस्त!!
रामप्यारी तो है ही इतनी प्यारी...सबकी दुलारी...चॉकलेट की लालची लग जाती है बस...:) क्या कमेंट बटोरे सबके प्यारे प्यारे...अब तो समीर अंकल उसे और चॉकलेट लाकर देंगे..बोल गये हैं पहले ही और नई फ्राक भी दिलावेंगे.
अतीत के झरोखे में मेरी दिली रचना ने रुला दिया...रोते रोते लिखी थी..आज रोते रोते पढ़ी..मेरी संवेदनाओं की कद्र इस कदर देख आपके लिए बस आभार निकला..आप ने मुझे समझा...मैं शुक्रगुजार हुआ.
बहुत उम्दा चर्चा...इश्वर बनाये रखे..दिल से कामना है.

My Photoसैयद | Syed said... @ October 24, 2009 7:19 AM

रामप्यारी को बहुत बहुत बधाई... हमें तो पता ही ना था की रामप्यारी एक रिकॉर्ड अपने नाम करने जा रही है, वरना हम भी ३०० के आंकडे में अपना नाम जोड़ लेते :(
समीर सर की रचना भावुक कर देने वाली है..

खुशदीप सहगल said... @ October 24, 2009 7:50 AMMy Photo

वीरेंद्र सहवाग के बाद पहली ट्रिपल सेंचुरी बनाने के लिए राम प्यारी को हार्दिक बधाई...
और पंकज भाई, चाहे अदा जी का करम ही सही, आपके चिट्ठा-चर्चा में अपना खाता तो खुला...बराहे करम, मेहरबानी, शुक्रिया...
जय हिंद

My Photoपं.डी.के.शर्मा"वत्स" said... @ October 24, 2009 2:24 PM

जब भी ब्लागजगत का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें रामप्यारी का नाम सबसे ऊपर होगा :)
इस कारनामे के बाद तो अब रामप्यारी "वरिष्ठ" ब्लागर्ज की कैटेगरी में शामिल हो चुकी है :)
बहुत ही बढिया रही आज की ये चर्चा.....
आभार्!

ललित शर्मा said... @ October 24, 2009 8:03 AMMy Photo

रामप्यारी को हमारी बधाई- चलो आपके इस रिकार्ड बनाने मे हम भी सहभागी बने,आपने घणी-घणी बधाई, आज तो गुगल वालों ने दो पेज़ जोड़े हैं कल इनको पुरा रेल रैक जोड़ना पडे, पंकज जी चर्चा बहुत जानदार रही,आपको शुभकामनाएं

 

ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है...खुशदीप

My Photo'अदा' said...

आप भी न !!!
वैसे शायद इसी को कहते हैं "चूना लगाना !!!"
हा हा हा हा हा

October 24, 2009 4:35 AM

My PhotoShefali Pande said...

हम तो इन स्लोग ओवरों के मारे हैं खुशदीप भाई ....कहाँ कहाँ से ढूंढ लाते हैं आप इन्हें

October 24, 2009 9:21 PM

My Photoराजीव तनेजा said...

क्यों झूठ बोलते हैँ खुशदीप जी?...आपके मक्खन की तरह मैँने भी तय मेहनताने के अलावा अपने पुताई वाले को दो सौ के बजाए तीन सौ रुपए थमाए कि ..."जा!...ऐश कर...शाम को बीवी के साथ पिक्चर-विक्चर देख लैईयो "...लेकिन वो पट्ठा तो साफ मुकर गया..
शायद!...उसने मेरा सूजा हुआ चौखटा और घर में पड़ा ..टूटा हुआ बेलन देख लिया था :-(
जय हिन्द

October 24, 2009 7:26 AM
My Photo

जी.के. अवधिया said...
 

खुशदीप जी,
लोग कितना भी कहें पर गाना तो बिल्कुल मत गाना। एक बार स्टेज में हमसे यही गलती हुई थी कि गा दिया था। बस फिर क्या था बार बार 'वन्स मोर' 'वन्स मोर'! कई बार गाने के बाद जब हम थक गये तो कहा कि भाई दूसरों को भी तो सुनो। जवाब मिला था "स्साले जब तक ठीक से गा नहीं लेगा स्टेज से उतरने नहीं देंगे"।

October 24, 2009 8:46 AM

 

जीवित रहना चाहते हो तो एक अदद सगे सम्बन्धी का जुगाड़ तो कर ही लो!

 

My Photoशरद कोकास ने कहा…

चेन्नई के ही एक अस्पताल के सामने यह दृश्य मै देख चुका हूँ आश्चर्य कि वह गरीब बीमार एक दक्षिणभाषी था लेकिन वहाँ उसका कोई सम्बन्धी न था उसे न हिन्दी आती थी न इंग्लिश् मैने किसी तरह भरती करवाने मे उसकी मदद की । पता नहीं इंसानियत को यह क्या होता जा रहा है ।

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा… My Photo

सुधीर को कोई सगा सम्‍बंधी ही छोड गया होगा। लेकिन अस्‍पताल वाले मरीज को बाहर फेंक दें, यह अमानवीयता है। अस्‍पताल में भी सैकडों मरीज होते हैं और वे सभी को नर्स मुहैया नहीं करा सकते इसी कारण वे परिवारजन की मांग करते हैं लेकिन यदि रोगी अकेला ही है तो ऐसी अमानवीयता दिखाना तो निंदनीय है।

 

इलाहाबाद से लौट कर :कुछ खरी कुछ खोटी और कुछ खटकती बातें !   एक असली रिपोर्ट…आंखों देखी ..जिस पर निम्न टिप्पणि आई है…

 

 

My Photo

Mishra Pankaj said...

मिश्रा जी , आपने सही कहा है इसको जबरिया बाजारू  चैनल की तरह लाइव बताया जा रहा था , जबकी ये तो एकदम से समझ समझ कर और छाट  छाट  कर फोटो बाजी और रिपोर्टिंग बाजी हुई है ..................
और हां ,
आये थे सम्मलेन में लोटन लगे लोट्वास,,......................
क्या अपनी बात मनवाने केलिए दुसरे का जनाजा निकालना जरूरी है ?
कुछ इसी तर्ज पर की दुसरे का बड़प्पन करने के लिए क्या खुद को नीचा  दीखाना जरूरी है ?

 

अऊर एक खास खबर ई है कि आजकल मगरुरवा भीख मांगत फ़िरत हैं…अरे भाई समझत काहे नाही हो? मतबल ई कि जिन लोगन की खिल्ली उडाने काम ऊ करत रहत थे उन लोगन से आजकल कवि बनने का खातिर भोट मांगत फ़िरत हैं…उनका जी टाक मा भीख मा भोट मांगत फ़िर रहे हैं…पहले काहे नाही सोचा ? लोगों का खिल्ली उडाने से पहले सोचने का था कि कभी कवि बनने का लिये भीख भी मांगनी पड सकत है.

अब टिप्पू चच्चा की टिप टिप..बकिया चर्चा कल करेंगे…



जोड घटाव :-

१. इस पोस्ट मे विवेक रस्तोगी की टिप्पणी मे ध्यान दिलाये जाने पर उनकी पोस्ट मेरे सभी दोस्तों को (To All my friends…) का शीर्षक २५ अक्टूबर २००९ को सुबह ९:०० बजे जोडा गया है।

-चच्चा टिप्पूसिंह

20 comments »

  • Mishra Pankaj said:  

    चच्चा टिप टिप ले लो शानदार और इतना तेज रिपोर्टिंग तो सचमुच नहीं हुई कही है

  • Mishra Pankaj said:  

    हमका लागत रहा कि आप इलाहाबाद में हो और सही पूछो तो कलही से हम आपके ही इंतज़ार में थे काहे के कि पता रहल की आपे सबसे तेज रिपोर्टिंग करब और कइल भी सबसे तेज और निष्पक्ष रिपोर्टिंगकरब

  • Vivek Rastogi said:  

    चच्चा गोदियाल जी की टिप्पणी तो दे दी पर हमारे पोस्ट जिस पर ये टिप्पणी दी है उसका पता देना भूल गये। :(

  • खुशदीप सहगल said:  

    जंह जंह पाँव पड़े चच्चा के तंह तंह बेड़ा पार...

    जय हिंद...

  • Udan Tashtari said:  

    टिप्पू चच्चा की नजर है या रेडार...कोई बच नहीं पा रहा..दूर दूर से सब को लपेटे ले आये हो चच्चा!! इसी से तो भागे आ जाते हैं जब पता चलता है टिप्पू चाचा आ गये. आप नहीं गये बिलागर सम्मेलन में इलाहाबाद?

  • शरद कोकास said:  

    चच्चा यह मेरी फोटो कभी कभी बड़ी मिसफिट हो जाती है जिसे आपने प्रमुखता से स्थान दिया वह मेरी एक गम्भीर टिप्पणी है लेकिन बगल मे मेरा दाँत दिखाता हुआ फोटू देखिये ऐसा लगता है जैसे मै कोई चुटकुला सुना रहा हूँ । एक ठो एक्स्ट्रा फोटो का प्रावधान नहीं है क्या ?

  • ललित शर्मा said:  

    लपटत परत गरत हपटत-झटपट हपटत सरपट चलत ।
    मंगत कर धर वर समरथन जब कलम धर कह बनत । ।
    जय होय भैया तोहार, अब एहो दिन देखे के परी-होवन दे पै लागी
    (आजकल मगरुरवा भीख मांगत फ़िरत हैं-पहले काहे नाही सोचा ? लोगों का खिल्ली उडाने से पहले सोचने का था कि कभी कवि बनने का लिये भीख भी मांगनी पड सकत है.)

  • पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said:  

    "कभी कवि बनने का लिये भीख भी मांगनी पड सकत है"

    कमाल है!! कवि बनने के लिए इत्ती भारी अग्नि परीक्षा :)

  • Mishra Pankaj said:  

    शरद जी आपने तो अपनी खुद की मौज ले ली :)

  • Mishra Pankaj said:  

    अऊर एक खास खबर ई है कि आजकल मगरुरवा भीख मांगत फ़िरत हैं
    इ बात आपके कैसे पता चलल चच्चा जी

  • Mishra Pankaj said:  

    @पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

    पंडित जी कमाल तो मुझे भी लग रहा है पर का करेगे शायद आज कल इ भी स्मार्टनेस में आवत हो:)

  • वाणी गीत said:  

    बाप रे ...हमरा टिपियाये पे इतना नजर है ...अब तनिक सोच समझ के टिपियाये पड़ी ...
    अच्छा रहा यह अंक भी ...!!

  • Arvind Mishra said:  

    हाँ विवेक की परिकल्पनात्मक टिप्पणी सही है वे आये होते तो उनको भी भाव दिया जाता -खेमा उन्ही का हावी था !
    क्या करियेगा हिन्दी बेल्ट अपनी इन कमजोरियों से उठ ही नहीं पा रहा !

  • दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said:  

    टिप्पू चच्चा ने कुंभ में कुछ नहीं देख्या?

  • अल्पना वर्मा said:  

    बहुत बढ़िया चर्चा.

  • Mishra Pankaj said:  

    मिश्रा जी सब एक साथ कैसे रह सकते है किसी को तो बैकप के लिए छोडना चाहिए ना :)

  • 'अदा' said:  

    अहाआआ !!!
    टिपण्णी की ऐसी मनोरम छटा देख मन तिपन्निमय हो गया है....
    ऐसा प्रतीत होता है स्वयं टिपण्णी देवता टिपण्णी की बारिश कर के गए हैं....हमरा भी स्वयं टिपण्णी देवता दिए रहे दरसन और कहा....जा बालिके टिपण्णी का भडार दिया तुझे...खूब टिपण्णी कर.....और टिपण्णी चर्चा में तुम्हारी छवि (black and white) यत्र-तत्र सर्वत्र ..गाहे-बगाहे दिखाई पड़ेगी......लोग तुम्हें टिपण्णी कुमारी के नाम से याद रखेंगे....बस उहे तिपन्निया ले आये हैं चढावा चढाने महराज......स्वीकार करल जावे...!!!!

  • गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said:  

    लोकेषणा बनाम कहास दिखास छपास दिखास जैसे
    तत्वों का रचनाकार उर्फ़ ब्लागर्स की देह
    में भी हैं उसके चलते जो भी हो रहा है ठीक ही है

  • MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर said:  

    Dear Tipu chachaa,
    your point of discussion is very good and your IQ seems to be very well. I like your blog and the discussion you hold!
    And aajkal tippaniyo main "Adaaji" ke vichaar aur darshan prapt ho jaate hain..............!
    God Bless You and plz continue such work!!!

    THANK YOU :)
    HEY PRABHU YEH TERAPANTH

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