,

चाहता तो बच सकता था, मगर कैसे? कोई बतायेगा क्या?

10/21/2009 Leave a Comment

लो जी टिप टिप करते हुये चच्चा टिप्पूसिंह फ़िर से मैदान मा हैं…अब बिना बख्त गंवाये टिप्पणियों की टिप टिप करके हमको जाना है. काहे से की हमको आज मेट्रो मे सलीमा देखे का है. साथ मा रोहितवा और चच्ची भी जा रहे हैं. 

 

चाहता तो बच सकता था, मगर कैसे बच सकता था (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की !!!)...

 

Arvind Mishra said... @ October 21, 2009 7:43 AM

"वहाँ सुमेरु पुरुषों के जमावड़े में अपने पाँव लचक गये । मन में एक अतृप्त इच्छा थी, चर्चा करने की ।"


पहले तो आपका इस मंच पर स्वागत ,अभिनन्दन ! इस मंच को गुरुता मिली ! पकज को भी बधाई !


सुमेरु को छोडिये आप खुद मैनाक कुल के हैं जहां हनुमान सरीखे महाबली भी पनाह माँगेंगे !


चर्चा जारी रखें -यही स्नेहाशीष !

 

 

इसी पोस्ट से एक और टिप्पणी….

 

'अदा' said... @ October 21, 2009 5:42 AMada

हिमांशु जी,
आपकी चिटठा चर्चा :
कमाल है,
धमाल है,
बवाल है,
झपताल है
तीन ताल है
और सौ बात की एक बात..
बेमिसाल है....
बधाई...

 

"लू तो कोन सा लू.? कृप्या आप भी राय दे..."

 

My Photoराजकुमार ग्वालानी said...

अपने जेब की गर्मी के हिसाब से लें। कहते हैं कि चाय में जितनी शक्कर डालेंगे चाय उतनी मीठी होगी। यही बात सभी तरह से लेपटॉप और मोबाइल के साथ लागू होती है। आप को ज्यादा सुविधा वाला चाहिए तो ज्यादा जेब गर्म होनी चाहिए, कम सुविधा वाला काम चलाऊ चाहिए तो फिर 25 हजार में भी मिल जाएगा। अब यह तो आपको तय करना है कि आप अपने जेब से कितना नकदाऊ खर्च कर सकते हैं।

 

'रात ग़मे तन्हाई की --चंदा ओ चंदा '

 

दिगम्बर नासवा said...

आसमान से भी बिछड़ गया है कोई,
वरना क्यूँ ये बेमौसम बरस जाते हैं.
सच कहा जुदाई के आंसू ही होते हैं जो कभी दर्द और कभी अनायास निकल आते हैं बादलों का सीना चीर कर .......
तेरी यादों से रिश्ते कायम हैं अभी,
इसलिए हर राह से बेखौफ गुज़र जाते हैं।
सुभान अल्ला ........ कमल का शेर है ... किसी के एहसास से भी कितना फर्क पड़ता है .......... रास्ते आसान हो जाते हैं .......
बहुत खूबसूरत शेर हैं सब ............ कमाल का लिखा है ........... और आपकी आवाज़ में गाया गीत ....... सुन रहा हूँ और बस गुनगुना रहा हूँ साथ में ............

OCTOBER 21, 2009 8:55 AM

 

ओ मन मेरे !! कुछ तो बोल....

 

सीधी सच्ची बात कही थी
बेवजह इनमें जहर न घोल
सहजता से कही गयी बातों में भी जहर घोलता है कौन ...!!
बातें कर ले जी भर कर के
बोलने से पहले शब्द को तोल
जी भर के की गयी बातों को अगर तौल कर कहा जाये तो सहज स्वाभाविक कहाँ रह पाएंगी मगर ऐसा करना होगा ...दस्तूर -ए -दुनिया निभाना होगा ...
दो विरोधाभासी वक्तव्य हैं .....कल की उलझन सुलझी नहीं अब तक ....!!!!

 

कोई काला टीका तो लाओ...खुशदीप

 

Drd2दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said... 

यह तो प्रकृति का नियम है। जो श्रेष्ठ होगा वही ठहरेगा। बाकी नष्ट हो जाएगा। पर जीवन में अपशिष्ट का उत्पादन तो निरंतर होता रहता है।

October 21, 2009 8:18 AM

 

विस्थापन के डर से सहमी हैं जंगल की बेटियाँ/ बाबा मायाराम

 

anil pusadkar anilPUSADKAR
October 21, 2009 at 10:49 am

बाबा मायाराम की जय हो।खबरों की भीड़ मे खबर बने लोगो का दर्द ढूंढ पाना बाबा मायाराम के ही बस की बात है।एक बार फ़िर जय हो बाबा मायाराम की।

 

बहस में टिप्पणी का जवाब नहीं दिए जाना क्या अशोभनीय माना जाएगा ?

 

My PhotoRakesh Singh - राकेश सिंह on October 20, 2009 10:54 PM

पंकज भाई मैंने भी कुछ ब्लॉगर ऐसे देखे हैं जो चर्चा तो आरम्भ कर देते हैं पर टिप्पणियों का जवाब देते नहीं | एक और ऐसा उदाहरण आप यहाँ देख सकते हैं : http://darvaar.blogspot.com/2009/10/blog-post_14.html
मैंने ये टिप्पणी Oct 15 को की पर आज तक कोई जवाब नहीं :
Rakesh Singh - राकेश सिंह ने कहा…
@धीरू भाई जब आपने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया है तो सबों की टिप्पणियों को उचित सम्मान देते हुए निसाचर जी, सुरेश जी, जयराम जी और मेरे सवालों का उचित जवाब भी दीजिये
ये गलत परंपरा है की टिप्पणी का जवाब ही नहीं दिया जाए | यदि टिप्पणी का जवाब ही नहीं देना है तो अपने ब्लॉग पे टिप्पणी ही क्यूँ allow करते हैं या फिर बड़े बड़े शब्दों मैं क्यों नहीं लिख देते की मैं टिप्पणी का जवाब नहीं दूंगा ....
आपने बिलकुल सार्थक चर्चा की है ...

 

बेटे की शादी में अनोखेलाल जी का हंगामा…

 

महफूज़ अली said... My Photo

थूक दिए समधिन के उपर, जम के मचा बवाल,
बेटे की शादी करने, जब चले अनोखे लाल.
समधिन ने दो दिए जमा के, गाल हो गये लाल
बेटे की शादी करने, जब चले अनोखे लाल.
hahahahahahaha............ bechare anokhe lal...... aakhir kar hi liye apne gaal laal......... hahahahaha

October 20, 2009 11:13 AM

 
अब चच्चा को इजाजत दिजिये….और टिप टिप लिजिये…चारो तरफ़ चर्चा चल रही है कि ब्लाग मे कुछ कंटकों को बाहर किया जाये…कल तो शाश्त्रीजी कहे रहिन…आज खुशदीप कहे हैं…अऊर ई लोग कौन हैं?  आप सब जानत नही हैं का? तो काहे नाही इन लोगन का बोरिया बिस्तर गोल करवाये देत हैं?
 
ई लोग त ऐसन लोग हैं के जब इच्छा हुआ ..जहां इच्छा हुआ..चाहे जो टिपिया के आपन बिल मा घुस लेत हैं…इनसे जवाब मांगा जाये… आप लोग मत मांगिये..चच्चा त इनको बख्सने वाला नाही है….हमार इज्जत कोई किलो पांव मे तुल रहि है का? जो ई लोग बेच देगा..
 
जय हो..जय हो..जय हो!!!
 
कायरों का नाश हो
 
बहादुरों का इकबाल बुलंद हो!
 
अब चचा टिप्पू सिंह की तरफ़ से टिप टिप…….

11 comments »

  • दिगम्बर नासवा said:  

    चचा आप भी अलग अलग तरह की टिप्पणियाँ इकाट्ठी कर रहे हो .......... भाई किताब छाप देना एक ......... अगर कभी अकाल पड़ गया टिप्पणियों का तो किताब से ढूंढ लेंगे .......
    जबरदस्त कलेक्शन है आज तो ...........

  • Mishra Pankaj said:  

    अरे चच्चा चच्ची मान गयी का ? आप तो कह रहे थे कि जा तक बदला नहीं लेगे तब तक घर में नहीं घुसने देगे , अच्छा हां फिलम तो बाहर देखने जा रहे है ना ,

    अब मै भी बोल रहा हु जय हो जय हो जय हो

  • Udan Tashtari said:  

    जय हो..जय हो..जय हो!!!

    चच्चा, कौउन सिलेमा देखे..अगली बार बताना जरुर. :)

  • हिमांशु । Himanshu said:  

    ब्लॉग कंटक बाहर न करो चच्चा जी ! इन्हें रहना ही चाहिये । आप तो पहचान भी गये हो, फिर क्या परेशानी !

    टिप्पणी-चर्चा का यही तेवर बनाये रखें । धन्यवाद ।

  • समयचक्र said:  

    अच्छी चर्चा . सिनेमा की कमेंट्री जरुर कर चच्चा जी ....

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    वाह चच्चा बहुत लाजवाब छांट कर लाये हैं? हिमांशु जी सही कह रहे हैं. आपने एक नयी विधा पर काम शुरु किया है तो इसे एक नई ऊंचाई पर आप अवश्य पहुंचायेंगे ,यही उम्मीद है आपसे.

    और चच्चा सनीमा कौन सा देख कर आये? हमे भी बताये..या हो सके तो उसकी भी समीक्षा कर दें.

    रामराम.

  • Rakesh Singh - राकेश सिंह said:  

    वाह भाई वाह ....

    अक्सर टिप्पणियों को उतना वजन नहीं मिल पाता जितना मिलना चाहिए | आपका ये जबरदस्त प्रयास टिप्पणी को उसका हक़ दिला रहा है |

    बहुत सुन्दर ... लगे रहिये

  • Ratan Singh Shekhawat said:  

    इनसे जवाब मांगा जाये… आप लोग मत मांगिये..चच्चा त इनको बख्सने वाला नाही है

    चच्चा अवांछित तत्वों को कभी न बक्सना | हम तुम्हारे साथ है |

  • राजीव तनेजा said:  

    बढिया टिप्पणी चर्चा ...

  • 'अदा' said:  

    हमका सुनाय के सिनेमा देखे जायला ..
    हाय करेजा फाटेला ए टिप्पू चाचा...
    ए चचा जिया जरेला तो बोलिला ...ए चचा...

  • पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said:  

    बहादुरों का इकबाल बुलंद हो :)

    बढिया!

  • Leave your response!