भोजपुरी, हरयाणवी या और किसी क्षेत्रीय भाषा के ब्लाग डिलिट हों : मगरुरवा कहिन !!!

10/13/2009 Leave a Comment

लो जी फ़िर मंगलवार आगया और टिप्पू चच्चा आगये आपसे मंगली चर्चा करने। अऊर सबसे पहले तो चच्चा की टिप टिप ले लो जी आप तो। अऊर मियां ऊ का कहत हैं कि आज हम का बडा काम है दिवाली का सो बिना समय गंवाये सीधे मतबल की बात पर आया जाये।

टिप्पणियों के रूप में कड़ी भर्त्सना और आरोप झेलने को मिलने वाले हैं आज
पर आज यूं तो जमाने की तकरार है पर हमारा दिमाग तो इस मगरूर बच्चा ने घुमा दिया। इसको फ़िर से अपनी अक्ल से ज्यादा बोलने की बीमारी लग गई है। अब हरयाणवीं और भोजपुरी ब्लाग हटाने की सलाह दे रहा है। इसका वश चले तो ई खुद का छोडकर सबके ब्लाग मिटवा दे....अब हरयाणवी और भोजपुरी भाईयों ..आपको अगर अपना ब्लाग रखना है तो अब मगरुरवा से सिफ़ारिश करवाओ..वर्ना मगरुरवा ने तो आपका पत्ता साफ़ कर ही दिया है।



कुश Says:

Posted on October 12, 2009 11:57 AM
सबसे पहले तो कविता जी को बहुत बधाई इस शानदार चर्चा के लिए.. ऐसी चर्चा करने के लिए साहस की आवश्यकता होती है..

आगे, यदि हिंदी ब्लॉगजगत में सिर्फ हिंदी ही लिखी जानी चाहिए तो उन ब्लोग्स को तुंरत डिलीट किया जाते जिन पर भोजपुरी, हरयाणवी या और किसी क्षेत्रीय भाषा में कुछ लिखा जाता हो क्योंकि हमें बढा तो हिंदी को देना है.. वैसे व्यक्तिगत रूप से मैं ये मानताहूँ कि किसी भी ब्लॉग पर कैसी भी टिपण्णी रखना उस ब्लॉग स्वामी के अधिकार में आता है.. इस पर किसी प्रकार की बहस नहीं की जा सकती

बाकी बहस, विवाद, आपत्तिया गलत नहीं है पर सिर्फ तब तक जब तक की वे निजी नहीं हो जाये..


इसी पोस्टवा पर नीचे का टिप्पणी भी तनि देखा जाये....अरे स्वार्थी जी आप काहे से हल्कान हो रहे हैं? ई त इनका पुराना ईश्टाइल ना है।.....ई अपने आजू बाझु ई मगरुरवा जैसे छर्रे इसी लिये त रक्खे हैं ना। समझा किजिये....आज ई जो आपसी सर फ़ुट्टोव्वल चल रहा है ऊ सब इनका ही त करा धरा है ना। ई मगरुरवा वगरुरवा त इनके कहे पे चलत हैं...यानि इनका छर्रा लोग हैं ई सब तो।

इन छर्रा लोगन से दूसरा का इज्जत खराब करवावत हैं...अगर ई ऐसन नाही चाहते होते त इन छर्रन से माफ़ी मंगवा कर बात को इहां ही खत्म करवाय सकत थे..पर अब एक नया झमेला अऊर खडा करवाय दिया हरय़ाणवी....भोजपुरी का बंद करे का?


राजेश स्वार्थी Says:

Posted on October 13, 2009 7:42 AM
अनूप शुक्ला जी ने फिर हमेशा की माफिक भड़काने का काम किया है, यह उनकी आदत है. शर्मनाक काम करते हैं वो वरिष्त होकर भी हमेशा.


सटकर बैठा चांद एक दिन मम्मी से यह बोला
पर मगरुर बच्चा कुवारे का अवतार मा प्रकट भया है। दूसरो को सलाह देने वाले और चर्चा करने वाले का यह तुरंत रुप बदलकर छिछोरी हरकत क्या आप पसंद करेंगे? हम तो इसकी निंदा करते हैं अऊर आप सबसे निवेदन है कि ऐसे बहुरुपिये को अब बर्दाश्त नही किया जाना चाहिये। इनकी यह बच्चा मानसिकता क्या चिट्ठाचर्चा जैसे परिपक्व मंच के लिये उपयुक्त है? जहां ये चाहे जैसी दूसरों की इज्जत खराब करता है? अऊर आज तो हरयाणवी अऊर भोजपुरी ब्लाग बंद करने की सिफ़ारिश करता है? शर्म आनी चाहिये....!

हरयाणा वालों अऊर भोजपुरियो अब चेत जावो..अब तुम्हारी इज्जत खराब करबे की सूझी है ई मगरुरवा को. नीचे इसके हलकट विचारों की टिप्पणी पढिए... अऊर चच्चा की सलाह है इस मगरुरवा को..जा तनि पहले शादी वादी करवा कर आ..अभी तू बच्चा है त बच्चा ही बन के रह...जियादा बुजुर्गी ओढे का का जरुरत है? कहीं बकरी समझ के चीता का मूंह हाथ डाल देगा त..क्या होगा? सोच ले...

अऊर काहे ई कुवारे का अलग फ़ोटो..और बिन कुवारे का अलग फ़ोटो लगात हो?

कुश 'कुंवारे'
October 12, 2009 at 7:43 am | Permalink
इधर हमारी खुद की शादी अटकी पड़ी है और आप उसमे दुसरो की सेटिंग करवा रहे है.. हम तो आपको राजा बेटा समझे थे पर आप तो बड़े वो निकले.


हिंदुत्व...तेरी कहानी..

Arvind Mishra said...
आज एक बैठक में आपकी कई रचनाएँ पढ़ डाली (कोई उपकार नहीं किया -वे मेरा /या मैं उनका परिशीलन डिजर्व करती हैं/करता हूँ !) मिथकीय चरित्रों को लेकर आपका काव्य प्रणयन आपकी मौलिकता है -और घिसे पिटे /रूढ़ प्रस्तुतियों से अलग हट कर है !
इस मौलिकता और ताजगी को बनाये रखिये ! आपने इस तेवर को छोडा तो आपकी मौलिकता गयी -आपका होना गया !
October 12, 2009 8:27 PM


चर्चा का आज का ये अंक समर्पित है हमारे ब्लागजगत के महान व्यक्तित्व के धनी श्री समीर लाल "समीर " जी को
बहुते सुंदर पोस्ट पर चंद बहुते सुंदर टिप्पणीयां देखिये।


Meenu Khare said... @ October 13, 2009 7:36 AM
सबसे पहले समीर जी को नमस्कार और बधाई.निर्मला कपिला जी, दरपन जी और श्रीश प्रखर जी की रचनाएँ विशेष तौर पर अच्छी लगीं. महफ़ूज़ जी की पोस्ट भी ok लगी.



इसी पोस्टवा पर देखिये....




श्रीश पाठक 'प्रखर' said... @ October 13, 2009 9:37 AM
आभारी हूँ पंकज जी का..ईमानदारी से कहूं तो मुझे तो सहसा विश्वास नहीं हुआ..ब्लोगिंग का पहला पुरस्कार है ये तो मेरे लिए...आभार...





रेत, वैतरणी नाला और बन्दर पांड़े



Ratan Singh Shekhawat said...

रेत में खेलती तस्वीर ने तो गांव का बचपन याद करा दिया , क्या मजा आता था बालू रेत के टिल्लों पर लुढ़कर खेलने का ! बचपन का कोई एसा दिन नहीं बिता होगा जब रेत में लोटकर ना खेलें हो !
वैतरणी नाले का गंगा में संगम ना होना सुखद समाचार लगा |





"गब्बर" मरा नहीं, फटा था...खुशदीप


राजीव तनेजा said...
एक फिल्म अवार्ड समारोह में मैँने भी अमिताभ बच्चन जी को यही कहते सुना था कि शोले के लिए धर्मेन्द्र जी ने उनकी सिफारिश की थी...उस समय धर्मेन्द्र जी भी वहाँ पर मौजूद थे।उन्होंने विनम्रतापूर्वक ये कहा था कि... "मुझे याद नहीं पड़ता कि कब मैने आपकी सिफारिश की"...

उसके बाद अभी कुछ दिन पहले मैँने कहीं सलीम खान जी(सलीम-जावेद वाले जो शोले फिल्म के लेखक भी थे) का साक्षातकार पढा था...उसमें उन्होंने दावा किया था कि अमिताभ की सिफारिश धर्मेन्द्र ने नहीं बल्कि उन्होंने की थी।इस बात का उन्हें शिक्वा भी था कि अमिताभ बच्चन ने उनके बजाए धर्मेन्द्र को इसका श्रेय दिया।..

बाकी शोले पुराण बहुत ही बढिया रहा...और हाँ एक ज़रूरी बात जिस किसी ने भी शोले देखी है..उनमें से क्या कोई बता सकता है कि फिल्म के अंत में गब्बर सिंह ज़िन्दा बचता है या फिर मुर्दा?...

मुझे उम्मीद है कि ज़्यादतर के जवाब गलत होंगे :-)
October 13, 2009 9:48 AM


ब्लोगजगत का संक्रमणकाल: अपना सर्वस्व और सर्वश्रेष्ट देने का समय
पर झा जी भी परिक्षा लिये रहिन शुक्राणू और विषाणू की...पर आखिर कार पकडे ना गये?




पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…
झा जी, पोस्ट तो आपने बहुत बढिया लिखी है...इस विषय में आपके विचारों से हम भी पूर्णत:सहमत हैं कि इस प्रकार विवादों में उलझने की अपेक्षा कुछ सार्थक किया जाए तो ही हम कह सकते हैं कि वास्तव में हिन्दी ब्लागिंग का भविष्य सुरक्षित है ।
किन्तु आपने जो "शुक्राणु" शब्द का प्रयोग किया है, वो हमें समझ में नहीं आया । कीटाणु या जीवाणु लिखते तो सही होता ।
October 12, 2009 8:33 PM


अऊर फ़िर खुदे टिप्पणी करना पडा ना...भाई झा जी आप त बडे फ़न्नी हैं जी! बच्चा लोगन का खाम्ख्वाह परिच्छा ले लिये!

अजय कुमार झा ने कहा…
हा...हा..हा..आखिर आपने पकड ही लिया..दरअसल मैं प्रयोग तो जीवाणु या कीटाणु ही करना चाहता था ..मगर फ़िर सोचा कि ये सब तो वो वायरस हैं जिनका तोड देर सवेर निकल ही आता है..मगर ये मुद्दे तो शुक्राणु ही साबित हो रहे हैं....जिनसे जाने क्या क्या पनप रहा है..और ये शुक्राणु इस कारण भी हैं क्योंकि पल में ही द्विगुणित होते जाते हैं..और कुछ मकसद नहीं था ...उम्मीद है उद्देश्य को समझा जायेगा..
October 12, 2009 9:32 PM


"ताऊ पहेली - 43 विजेता सुश्री सीमा गुप्ता"



दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
October 12, 2009 5:02 PM

पत्रिका घणी आछी लागी। हम तो अपना गंजा सिर खुजाते खुजाते परेशान हो गए। जवाब ही नहीं मिला। समीर जी का मांग पत्र सही है, बोनस मिलना चाहिए। कम से कम सर पर जो निशान पड़ जाएंगे उन का मुआवजा तो मिले। हमारी मांगे पूरी करो वर्ना इंकलाब! जिन्दाबाद!


अऊर एक टिप्पणी इहां से देखा जाये...इहां पर रामप्यारी मैम पिनपिनाई हुई है...सबका डायरी मा रिमार्क लगा के...


अल्पना वर्मा
October 13, 2009 9:39 AM

सभी विजेताओं को बहुत बहुत बधाई.
इस के सभी विजेता ख़ास बधाई के पात्र हैं क्योंकि दिवाली नज़दीक है इस लिए सभी उसी दिशा में सोच रहे थे.
एक खूबसूरत दरवाजा एक बेरंग गुफा का हो सकता है ..शायद सोचना कठिन था.
आप इस की वीडियो यू ट्यूब पर देख सकते हैं.
@मुरारी पारीक जी इस पहेली ४३ के विरुद्ध अनशन पर बैठे थे..आशा है उनका अनशन खतम हो गया होगा.
@रामप्यारी मेम प्लीस इस बार सभी को माफ़ कर देना..त्योहारों का अवसर जो है.


अऊर अब अंत मा सबसे जियादा खुशी का बात....टिप्पू चच्चा की बधाई ..उडनतश्तरी को...देखा चच्चा का सिद्ध दरबार? कैसन फ़टाफ़ट आपकी मनोकामना पूरण भई? अब चच्चा का सिद्ध दरबार मा बिना नागा हाजरी लगाते रहना..चच्चा सब मनोरथ पूरण कर देंगे....जिसको भी अपना काम सिद्ध करवाना हो...वो आवै चच्चा का दरबार मा...

बिखरे मोती का विमोचन एवं समीर लाल सम्मानित

खुशदीप सहगल ने कहा…


गुरुदेव, सुबह सुबह इतने शुभ समाचार...यही सोच रहा हूं, कहां से शुरू करूं...सबसे पहले तो यही कहना चाहूंगा कि विमोचन बेशक...बिखरे मोती...का था, लेकिन कार्यक्रम का नाम... इकट्ठे मोती...होना चाहिेए था...

दूसरी बात... आपको साहित्य गौरव व शिवना सारस्वत सम्मान के लिए बहुत बहुत बधाई...वैसे आपका सम्मान खुद सम्मान का ही सम्मान है...

तीसरी बात...बेटे और बहू रानी के प्रथम गृह आगमन पर बहुत बहुत शुभकामनाएं...

चौथी बात...कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट, तस्वीरों, वीडियो का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा...

सुंदर कविताओं के लिए आभार...बस खत्म करता हूं...बधाई देने वाले इतने हो गए हैं कि आपके दरवाजे पर धक्कम-धक्का होने लगी है...व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक-दो मार्शल का इंतज़ाम कर लीजिए...

जय हिंद...
10/12/2009 07:05:00 पूर्वाह्न


अऊर देखिये...........

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…
पुत्र वधु का आगमन ऐसे होता है जैसे घर में नवीन यौवन आ गया हो। आपको नवयौवन के आगमन पर ढेर सारी बधाई। सम्‍मान मिलने पर भी बधाई। कार्यक्रम में पढ़ी गयी रचनाएं बेहद दिलचस्‍प थी।
10/12/2009 09:37:00 पूर्वाह्न


अऊर देखा जाये........

नीरज गोस्वामी ने कहा…
लीजिये साहब उतारिये बधाई से भरे टोकरे जो हम अपने सर पर रख कर आपके लिए लाये हैं..इन टोकरों में हैं बधाईयाँ...पुस्तक विमोचन की, पुत्र वधु के आगमन की और आपको मिले ढेर से सम्मानों की...उम्मीद करता हूँ की भविष्य में भी आप हमें इनसे भी भारी बधाईयों से भरे टोकरों को फिर से उठाने का अवसर प्रदान करते रहेंगे...बधाई गुरुदेव को जिनके अथक प्रयास से ये पुस्तक प्रकाश में आयी...
काश राकेश जी तक आप हमारा प्रणाम पहुंचा पाते...

नीरज
10/12/2009 10:58:00 पूर्वाह्न


अरे भाई ऊहां त बहुते लाइन लगी है टिप्पणियों कि..आप खुदे जाकर पढ ल्यो...लिंकवा उपर दे दिये हैं ना...

जिंदगी के रंग - मीत जी के संग़

राज भाटिय़ा said...
भगवान भी उसी की मदद करता है, जो कोशिश करता है.
बिलकुल सच कहा आप ने,अरी नैना बिटीयां पहले जाते थे, अब छोड दिया बच्चो की भलाई के लिये कम से कम बच्चे कुछ पेदल तो चले.... अपने आप को मोसम के सेंट तो कर सके ज्यादा नाजुक ना बने, हम कोन सा हमेशा उन के साथ रहेगे... अच्छे ओर समझ दार मां वाप बच्चो को इन बातो के लिये आजाद छोडते है, आप के पापा भी ठीक करते है

October 12, 2009 3:25 PM


तो ल्यो भैया..आज की टिप्पणी चर्चा पूरी भई....चच्चा को घर मा घुसने की मनाही है बदला लिये बगैर....आप तो दिवाली मनाओ..चच्चा तो आते रहेंगे आपको टिप्पणियां पढवाने...अऊर मगरुरों की मगरूरी चकनाचूर करने....रोहित बचुआ आपन दिपावली की छुटियों मा स्कूल ट्रीप मे शिमला मसूरी गये हैं...अब चच्चा तो इहां अकेले ब्लाग छानते रहेंगे...

चच्चा टिप्पू सिंह..की टिप टिप....

अन्याय के आगे नही झुकेंगे। सर कट जाये मगर सम्मान नही खोयेंगे।




चलते चलते


मगरुरवा का एक और गाली गलौज से भरा टिप्पणी देखा जाये.....शेम..शेम...शेम...........!

हालात-ए-हाज़रा

कुश said...
चाँद अगर किसी को नहलाएगा तो यकीनन काँधे से महक तो आएगी ही..
मैं तो कहता हु साले तुम पागल हो गए हो.. :)

Saturday, October 10, 2009


ये है ब्लाग जगत के चिट्ठाकर और उपदेशवादी ..आदर्शवादी... चर्चाकार.... देखली आपने... मगरुरवा की असलियत...छि:...छि:.....शेम..शेम..शेम....! इस कुत्सित मानसिकता पर..........

15 comments »

  • खुशदीप सहगल said:  

    चच्चा टिप्पू ज़िंदाबाद...

    टीपू सुल्तान के हाथ में तलवार रहती थी...हमारे चच्चा टिप्पू के पास है शब्दों की धार...जिस पर चल जाए कलेजा तक चीर दे...

    जय हिंद...

  • भोजपुरी said:  

    नाही जोधपुरिया हइ, नाही जयपुरिया ,
    हे भईया हम हइ खाटी , भोजपुरिया बबुआ ......

    हमारे सभी ब्लॉग भाइयो से निवेदन हइ कि अपना मत साफ़ रखे और ब्लॉग जगत को ऐसे संक्रमण से बचाए नहीं तो कल तुमकाभी लिखेगा ये मगरूर की का गजब का लिखे बा ससुरी .
    और अनूप के बोली की का गजब के लिखा हइ  ससुरा
    मार सारे के इ ता ब्लागिंग का सत्यानाश करे खातीर पैदा भइल बा
    दुर दुर दुर दुर दुर

    भोजपुरी 

  • Udan Tashtari said:  

    जय हो साचे दरबार की-टिप्पू चाचा की जय.

    बस आपका पुण्य प्रताप है, बनाये रखिये. :)

    बधाई और स्नेह का आभार.

  • कापालिक said:  

    वाह चच्चा...लगता है आप गंदगी साफ़ करवा कर ही दम लेंगे। चच्चा लगे रहो, सब आपके साथ हैं. चच्चा की जय हो ...दुष्टों का नाश हो। चच्चा टिप्पूसिंह की जय हो..आपका जाहोजलाल बना रहे।

  • Mishra Pankaj said:  

    चच्चा नमस्कार
    का बात है आप तो गजब कर रहे हो हम तो हैरान बाटी, परेशान नाही भाइ ,
    हम काहे परेशान होब?

  • अजय कुमार झा said:  

    चच्चा का कहा जाय.
    ..तब कहते हैं कि महफ़िल लुट गयी...अमां अईसन बात कहोगे तो लुटबे करेगी..ई हिसाब से तो एक सब कुछ डिलीट करवा दोगे भैया..और बात भोजपुरी , हरयाणवी ,,या मैथिली की नहीं..आपकी जानकारी के लिये बता दें कि ई सब ब्लोग जो है न ऊ देवनागिरी में ही लिखा जाता है ....समझ समझ का फ़ेर है ..आप न न समझियेगा....आप तो महफ़िले सजाईये ..ऊ भी लूटिये जाता है लोग..इंग्रेजी में काहे नहीं सजाते हैं..

    मह्फ़िल्स सजिंग इन इंग्रेजी..नो बडी कैन लूट,
    वर्ना ई टाईप की माहफ़िल से काहे डाले हो फ़ूट...

    समझे कि नाहीं...मिस्टर ..धुर धुर ....

  • प्रवीण शाह said:  

    .
    .
    .
    बेहतरीन टिप्पणी चर्चा,
    धन्यवाद चच्चा, पर एक अनुरोध रहेगा कि चर्चा को थोड़ा और विस्तार दीजिये...और हर चर्चा में एक दो नये चिठ्ठों पर आई टिप्पणियों की भी चर्चा करें...
    और हाँ अब ई अपमान का बदला-वदला छोड़िये भी ना...प्लीज!

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    हरयाणवी के नाम पर तो हम अकेले ही थोडा बहुत लिखते हैं. अब जब बंद करने का आदेश आयेगा तो बंद कर देंगे और क्या करें? जैसा मर्जी.

    पर ये समझ नही आया कि ये बंद करने का आदेश कौन देगा? जब चालू करने का कहीं से परमिशन नही लेना पडा तो बंद करने का कैसा आदेश ?

    लाठी और भैंस तो दोनो हमारे पास है? तो जिसका लाठी उसकी ही भैंस होगी ना? भाई हम तो आपकी शरण है आप भर कृपा बनाए रखना. बाकी तो सलट लेंगे.:)

    आपका चर्चा बडा मस्त है. जय हो टिप्पू चच्चा की.

    रामराम.

  • निशांत मिश्र - Nishant Mishra said:  

    अरे चच्चा! काहे नाहक परेसान होत हो!? तनिक कुशवा की टिपण्णी ध्यान से तो देखो! ऊ ससुर कहाँ कहे रहा है की भोजपुरी अऊर हरियाणवी ब्लौग बंद होने का चाही!

  • ललित शर्मा said:  

    पर ये समझ नही आया कि ये बंद करने का आदेश कौन देगा? जब चालू करने का कहीं से परमिशन नही लेना पडा तो बंद करने का कैसा आदेश ?

    लाठी और भैंस तो दोनो हमारे पास है? तो जिसका लाठी उसकी ही भैंस होगी ना? भाई हम तो आपकी शरण है आप भर कृपा बनाए रखना. बाकी तो सलट लेंगे.:)

    ई ताउ जी का बात से हम सहमत हुँ, भैंस भी हमार अउर लाठी भी हमार,
    हम क्षेत्रीय बोली का परचार का हक में हुं, भाषा कउनो हो लिपि देवनागरी होना चाही,

  • गिरीश पंकज said:  

    lok bhashaon ko bachana zaroori hai. jin logo ne hariyanvi, chhattisgadhi, bhojpuri, mathili aadi me blog shuroo kiye hai, unka to abhinandan hona chahiye. ve badhai ke patr hai. lok bhashao ke viruddh zahar ugalane vale log nadan hai. unhe maaf kar dena chahiye. ve nahi janate ki bechare kya kah rahe hai.

  • हिमांशु । Himanshu said:  

    आप ने तो यूँ आवाज बुलंद कर रखी है कि पूछिये मत ! निशान्त जी की बात का खयाल करिये । आभार ।

  • Mishra Pankaj said:  

    #

    दगी साफ़ करवा कर ही दम लेंगे। चच्चा लगे रहो, सब आपके साथ हैं. चच्चा की जय हो ...दुष्टों का नाश हो। चच्चा टिप्पूसिंह की जय हो..आपका जाहोजलाल बना रहे।

    #
    Mishra Pankaj Says:
    Posted on October 13, 2009 8:00 AM
    #

    चच्चा नमस्कार
    का बात है आप तो गजब कर रहे हो हम तो हैरान बाटी, परेशान नाही भाइ ,
    हम काहे परेशान होब?

  • Ratan Singh Shekhawat said:  

    बढ़िया चर्चा !
    गलत बयानी करने वालों को ऐसे ही धोते रहो चच्चा तभी अक्ल आएगी इन्हें !

  • राजीव तनेजा said:  

    हमरा फोटू अऊर टिप्पणी छापने के लिए बहुत-बहुत...बहुतायत धन्यवाद

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