बेचारी महफ़िल..कुछ ऐसी लुटी..कि दुनियां को कुच्छौ समझ नही आया….

10/11/2009 Leave a Comment

लो जी चच्चा टिप्पूसिंह फ़िर आ लगे आपसे टिप टिप करिबे को। ऊ का है ना कि चच्चा को चैन नाही है इसलिये फ़िर आ धमके आपसे टिप टिप करने। ऊ का है कि चच्ची ने हमसे साफ़ साफ़ कह दिया कि – देखो मियां ..अगर बिना अपमान का बदला चुकाये घर वापस आये तो हमारा मरा मुंह देखो। तो मियां हम तो बिना बदला निकाले घर जा नही सकते और इंहां खाली बैठे जो भी टिप्पणी मिप्पणी चर्चा हो….. ऊ करते रहेंगे। तो अब रोहित बचुआ आगये हैं और शुरु करते हैं आज की चर्चा…आज का समाचार हमार मतबल कि टिप्पणी बांचे का काम हम करेंगे और कंप्युटरवा पर अंगुलियां रोहित बचुआ चलायेंगे।

 

आज सबसे पहले ऊ पोस्टवा देखिये जो ब्लाग मालिकवा ने पूरे करीब डेढ महिना बाद लिखा है अऊर उपर से किसी के समझ मे ही नही आई..यानि उपर से ही निकल गई….का कहा जाये..अईसन लोगन को.....अपने आपको जरा ज्यादा छायावादी समझन लगे हैं। खुद का कुच्छौ पता नही अऊरन का   भूली बिसरी बात बताने मा लगे रहत हैं?

“ बेचारी महफ़िल..कुछ ऐसी लुटी..”  कि दुनियां को कुच्छौ समझ नही आया…..

 

  Blogger रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत गहरी पोस्ट है जो मुझ जैसे कमअक्ल के सर के ऊपर से गुजर गयी :(

October 10, 2009 9:08 AM

 

इसी पोस्ट पर दो टिप्पणी प्रति टिप्पणी देखिये तनिक।

 Blogger डॉ .अनुराग said...

किबला ...फिराक साहब याद आ गए .ऐसे मौको पे उनके बारे में कई किस्से है ...पर यहाँ लिखे तो मामला कुछ "सनसनी " सा हो जाएगा ...(वही स्टार न्यूज़ पे एक दाढ़ी वाली साहब आ कर कहते है .सनसनी )...


जैसे हमारे नॉन शायर दोस्त ने किसी का एक शेर कहा था ....गर बड़े लोग शेर माने ....
"कोई सौ बार तेरी गली से गुजरा हूँ
कोई सौ बार तू अपनी छत पे नहीं आयी "
ओर एक थे दुष्यंत कुमार ....उन्होंने कभी फरमाया था .
"हम लोग उंचे पोल के नीचे खड़े रहे
उल्टा था बल्ब मगर रौशनी ऊपर चली गयी"
बाकी .....बाद में

October 9, 2009 6:46 PM

Blogger गौतम राजरिशी said...

अरे ये महफ़िल तो जानी-पहचानी सी लगी है...
मुझे जो पता होता कि मेरे दर्ख्वाश्त पे इतनी जल्दी पोस्ट लगा दोगे, तनिक पहले कर देता ये दरख्वाश्त...


चलते-चलते, डाक्टर साब(निठ्ठले वाले नहीं) ने जिस शेर को दुष्यंत का बता कर चल दिये हैं, वो बशीर बद्र साब का है।

 

अब ऐसी मुशायरों की रपट लगाओगे कुश तो यही गड़बड़झाला होगा

October 10, 2009 2:14 PM

 

अब एक और पोस्ट …..

कार्टून:-आज दांत फाड़ने का दिन है...मुस्कुराने से काम नहीं चलेगा…..

Bhains

इस पोस्ट पर सबसे बडी टिप्पणि पर कमाल ये कि सिर्फ़ एक ही अक्षर में….

My PhotoUdan TashtariOctober 10, 2009 7:54 AM

हा, हा, हा, हा, हा, हा,हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा,
हा, हा, हा, हा, हा, हा,हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा
हा, हा, हा, हा, हा, हा,हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा
हा, हा, हा, हा, हा, हा,हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा
हा, हा, हा, हा, हा, हा,हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा
हा, हा, हा, हा, हा, हा,हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा
-नारद नाद!!

और अब इसी पोस्ट पर सबसे छोटी दो टिप्पणीया……

 

ए चौदहवी के चांद - सुहानी रात ढल चुकी है,, ना जाने तुम कब आओगे?


"अर्श" said...
बचपन में जब चित्रहार और रंगोली देखता था तो इस गाने का इंतज़ार हमेशा किया करता था , अगर कहूँ के यह गीत मेरे साथ बड़ा हुआ संगीत में तो गलत ना होगा... इस गाने के बोल म्यूजिक सब कुछ तो है और सबसे बड़ी बात है अदाकारी , फरीदा जी जीतनी खुबसूरत इसमें लगी है शायद ही कसी और गाने मैंने देखा है.. कुछ भी कह पाने में समर्थ नहीं हूँ इस गाने के लिए ...बहुत बहुत बधाई और आभार आपका दिलीप जी
अर्श
October 10, 2009 12:50 PM

यहां सब ज्ञानी हैं...खुशदीप

 

[pt[8].jpeg]  वाणी गीत said...

यहाँ ज्ञान ना बांटें ...ब्लॉगजगत की उठापटक तो यही बता रही है ...मगर जिसका नाम ही ज्ञान से जुडा हो ...वो क्या करे ...
स्लोग ओवर हमेशा की तरह लाजवाब है ...!!

October 10, 2009 7:52 AM

 

अब इसी पोस्ट पर टिप्पणी प्रति  टिप्पणी…….

My PhotoRatan Singh Shekhawat said...

किसी पोस्ट पर ही पढ़ा था, लेकिन लिखने वाले ब्लॉगर भाई का नाम याद नहीं आ रहा...इसलिए क्षमा चाहता हूं...
यहां ज्ञान मत बधारिए....यहां सब ज्ञानी हैं...
ये ताऊ रामपुरिया जी की प्रोफाइल में लिखा है |

October 10, 2009 7:33 AM

My Photoखुशदीप सहगल said...

रतन सिंह जी,
ध्यान दिलाने के लिए शुक्रिया...वैसे आपने देखा कि कितना अज्ञानी हूं मैं, अपनी पोस्ट में ताऊ की बात और ताऊ का ही प्रोफाइल भूल गया...
जय हिंद...

October 10, 2009 7:56 AM

 
करवा चौथ ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकता है….

 

[IMG0091A.jpg]अजय कुमार झा ने कहा…

अरे बाप रे मा साब इस महान पर्व की ऐसी अद्भुत व्याख्या तो आज तक कहीं पढी सुनी देखी न थी....आपने तो अजब ग्रंथ रच डाला..सूत्र पिरो जाने के बाद ..उसकी मेन गांठ ..तो श्रीमती जी के हाथ में ही होगी न...मतलब झंडोतोलन..

Saturday, October 10, 2009 10:22:00 PM

 

एक लाइन में चलती हुईं ताजा प्रविष्ठियां दिखाएं (Horizontal scrolling recent posts)…..

 

My Photoप्रवीण जाखड़ said...

ओजी वाह भई वाह। लगा लिय हमने भी। लग गई ताजा खबरें। ...और खबरों में तो संगीता जी ही संगीता जी नजर आ रही हैं। मजा आ गया। धन्यवाद आशीष जी।

11:41 PM IST

 

महिलाओं में परकाया प्रवेश : कुछ दिलचस्प तथ्य/अनुभव  ………….

 

My Photoडा० अमर कुमार ने कहा…


महज़ रोमाँचित करने के लिये रोचक विषय है,
मैंनें लवली के पोस्ट पर टिप्पणी नहीं दी । लवली क्षमा करना, वहाँ कुछ कहना हाईली वोलेटाइल हो जाता ।
तऽ.. झा जी, जब आहाँ ई विशय उठैबे कलिय छी, तऽ.. राऊर कने हम टिप्पनी देल सेफ़ बूझईछी ।
यह एक असामान्य व्यक्तित्व विकार है, जो मानसिक स्तर पर किन्हीं प्रवृत्तिवश उपजता है ।
अँधविश्वास से कूपमँडित परिवेश, अशिक्षा और अतृप्त आकाँक्षायें इसको पोसती हैं ।
उफ़ाननुमा एक दौरा आने या आकर गुज़र जाने के बाद भी इसका रोगी अपने स्वयं के व्यवहार को गलत, असँगत या मानवेतर नहीं मानता ।
उसका अचेतन मन यह मनवा कर रहता है कि,शे ईश्वर, मुझ पर या मेरे कृत्य पर अविश्वास करने वालों को माफ़ कर देना क्योंकि यह नहीं जानते कि यह मेरे लिये क्या सोच या कह रहे हैं । इसकी अचानक उत्पत्ति को अक्यूट कन्वर्ज़न रियेक्शन भी कहते हैं । इसके शिकार होने वालों में आते हैं :
1. अपरिपक्व व्यक्तित्व
2. हिस्टीरिकल व्यक्तित्व
3. स्वबाध्य ( ओबसेसिव ) व्यक्तित्व
4. चिंतित व्यक्तित्व
5. निर्भर व्यक्तित्व
6. सँदेही व्यक्तित्व
7. समाज से त्याज्य व्यक्तित्व
पर लवली के पोस्ट सहित इस आलेख से आनन्द आया ।
ब्लॉगिंग ज़वान हो रैली है, भाई !

October 8, 2009 5:54 PM

.

अऊर अब आखिर मां ई देखिये…..आज उर्मिला बोलेगी... 

 

 

सावधान ! हे रघुवंश
वो शब्द एक न तोलेगी
मूक बधिर नहीं,कुलवधू है
आज उर्मिला बोलेगी |

 

My Photoहिमांशु । Himanshu said...

कुछ उपेक्षित कर दिये गये पात्रों पर अपनी संवेदित दृष्टि डाल रही हैं आप ।
अंतिम पंक्तियाँ तो गजब हैं - उर्मिला का यह कहना कि अगले जन्म में तुम राम के भाई कभी मत बनना , हिला गया ।

October 10, 2009 5:06 AM

 

अब चच्चा टिप्पू सिंह और रोहित को आज्ञा दिजिये. हमार रोहित बचवा का ई प्रयास कैसन लगा?  आज हम रोहित बचुआ को प्रेक्टिस करा दिये हैं…अगर आपको अगली चर्चा यानि ब्लाग चर्चा रोहित बचुआ की तरफ़ से दिखे तो आश्चर्य मत किजियेगा।

 

हमारा सत्याग्रह जारी रहेगा…..हम अपने उपर  जुल्म नही सहन करुंगा…और आप भी मत सहन किजिये.  हमको अपना बेइज्जती  बडा दुख दे रहा है। हमार इज्जत को तार तार कर डाला… ऊ तो बिल मा घुस गया हमारा कलेजा मा आग लगाई के…अऊर आप लोगन को भी बडा दुख दिया है..हम उसको बिल मा निकाल के रहुंगा….भैया हमार कलेजा रोवत है…..

अब का बताई…?

अगर ऊ हमको दू चार झापड मार लिये होते त हम अब तक भुला गये होते..पर ई ससुर हम निर्दोष प्राणी को जबरने घसीट के भरी चौपाल मा बेइज्जत कर डाला…अब का करें..आप ही बताओ..हमार तो दिवाली ही खराब दिये हैं..ई लोग..अऊर खुद शान से घर मां घुस के बैठे हैं अऊर हम घर के बाहर पडा हूं….ठीक हैं..देखत हैं हम भी…

तो अब चच्चा टिप्पू सिंह की तरफ़ से टिप टिप……..

अन्याय के आगे नही झुकेंगे। सर कट जाये मगर सम्मान नही खोयेंगे।



नोट : हमारा सत्याग्रह को आपमे से 81% ने बिल्कुल सौ प्रतिशत सही माना है उसका लिये हम आपका धन्यवाद करता हूं अऊर भी आप लोग इस विषय मे भोट डालिये ना।

14 comments »

  • खुशदीप सहगल said:  

    टिप्पू चच्चा, ताऊ तो आपके लिए रामपुरी लट्ठ लिेए तैयार बैठा है...बड़ी मुश्किल से रोक रखा है...आप ये बताओ हमें आमरण अनशन कब से शुरू करना है...

    जय हिंद...

  • डा० अमर कुमार said:  



    माना कि बहुत आग है माहौल में लेकिन
    होगी समझ की बरसात मायूस न होना

    अब भैंस उसी की है लट्ठ भी है उसी की
    ब्लागर की किसी बात से मायूस न होना

    यह रँग यह माहौल बदल जायेगा चच्चा
    तुम बदले हुये हालात से मायूस न होना

    एक्ठो सतियागिरह करेगा, दोसरका अन्टशन्ट करेगा.. धुत्त !
    तऽ बिलागिंग का बिलार करेगा ?

  • SELECTION & COLLECTION SELECTION & COLLECTION said:  

    वाह चच्चा छा गऎ......... मगम्बो कुश हुआ
    mumbai tiger

  • SELECTION & COLLECTION SELECTION & COLLECTION said:  

    भूल सुधार
    कुश= की जगह खुश पढे



    मुम्बई टाईगर
    हे प्रभू यह तेरापन्थ

  • वाणी गीत said:  

    जोरदार रहा ई टिपण्णी चर्चा ...!!

  • बी एस पाबला said:  

    वाह!

    अच्छे तकनीकी मेल सहित उम्दा टिप्पणी चर्चा

    बी एस पाबला

  • Udan Tashtari said:  

    रोहितवा तो बड़का होनहार है जी चच्चा!! ऊ का तो सत्ता अलगे से सौंप दो..अच्छा बैण्ड मास्टर है..सहीये बजायेगा. आप आपन जरी रखियेगा मगर...मथ्था टेकने का तीरथ भी तो चाहिये न!!

  • 'अदा' said:  

    अब कतना तरीफवा का पूलवा बांधे...
    तिपनी चर्चा तो एकदम नीमन रहा भाई...औ आपका कम्पूटर बाबु भी एक फुलतौस रहे.....उहे रोहित्वा बाबु...!!

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    चचा आज तो आप फ़ुल फ़ार्म मे लिखे हो. आपकी तारीफ़ लायक तो शब्द ही नही हैं. और रोहित तो सच में ही बडा लायक बच्चा है. जरुर नाम कमायेगा. चचा की और चचा के दरबार की जय हो.

    रामराम.

  • Anil Pusadkar said:  

    मस्त चर्चा।

  • हिमांशु । Himanshu said:  

    टिप्पणी चर्चा का कलेवर बढ़िया ही बढ़िया हुआ जा रहा है चच्चा जी ।
    टिप्पणियाँ तो चुन चुन कर सजायी हैं आपने । आभार ।

  • संगीता पुरी said:  

    जी चच्‍चा .. सारे चिट्ठों से टिप्‍पणियों को ढूंढ ढूंढकर लाने में आपका जबाब नहीं .. जरा प्रवीण जाखड जी का मेरे नाम से ही इतना खुश हो जाने की वजह भी पता लगा दें .. तो हम आपके शुक्रगुजार रहेंगे जी .. ऐसे कोई खास वजह नहीं .. बस ऐसे ही जिज्ञासा बन गयी है !!

  • Ratan Singh Shekhawat said:  

    चच्चा आज भी मजेदार चर्चा कर गए | बस ऐसे ही चर्चाते रहिएगा |

  • Leave your response!