सांभा ने मौसी के सामने गब्बर की पोल खोली : ताऊ की शोले

9/02/2009 Leave a Comment

थोडी मस्ती थोड़ा फन ...SMS शायरी

ये ल्यो जी। ऊ का कहत हैं? मूंड मूंडाते ही ओले गिर गये जी. मैडम जी ने पोस्ट पर ताला लगाय रखा है। उन की पोस्ट पर ताऊ रामपुरिया टिपणी कर रहे हैं बीबी से पिटने की? शायद गलती से ताई की जगह बीबी लिख गये। आप खुदे जाके पढल्यो जी ऊंहा।

sanvednaon ke jharokhe se----sansmaran

ये ल्यो जी इनके बिलाग पर भी ताला? लगता है आज गलते मुहुर्त मे निकल लिये टिपणी ढूंढ्बे को? उडनतश्तरी की टिपणी देखल्यो जाके। पोस्ट भी बांचबे लायक है।

ग़ज़लों का जादू, पुरुषोत्तम 'यक़ीन' की युग्मित ग़ज़ल

नीरज गोस्वामी,
यकीन साहब को सलाम...दो ग़ज़लों को बहुत खूबसूरती से पिरोया है एक दूसरे में वाह...ये ग़ज़लें अकेले भी उतनी ही कमाल की हैं जितनी की मिल कर लगतीं हैं...ये किसी उस्ताद का ही काम हो सकता है...वाह..यकीन साहब वाह...
नीरज

अच्छाई को उजागर करती है... बुराई!
विनोद कुमार पांडेय said...
बुराई के अस्तित्व को जो ख़त्म करे वही अच्छाई है.
अब इसके लिए बुराई को पहले ही आना पड़ता है..

बढ़िया लेख!!

सांभा ने मौसी के सामने गब्बर की पोल खोली : ताऊ की शोले

मीत
आज कल उड़नतश्तरी का धंधा जोरों पर है क्या? कि फ़िर वो मुआ ऑडिट साडिट का चक्कर है? मेरे तो समझ में नहीं आये कि जब इतना बढ़िया खानदानी धंधा चल रहा था तो ये मुए नये धंधे पकड़ने की का जरूरत। खुद तो खानदान की लुटिया डुबो रहा है, साथ में वीरु का भी सत्यानाश करे है।

ह्म्म, तो ये मुई बिलागिंग ने सत्यानास किया है मेरे गब्बर का, पहले वो छमिया आयी थी बर्बाद करने। कौन गांव से है ये मुई ब्लागिंग, चल अभी उसका झोंटा काट उसके हाथ न दिया तो मेरा नाम भी जगत मौसी नहीं, हां
sssss नहीं तो।

वाह ताऊ क्या हंसाया है... आपने आज मजा आ गया...
मीत


बाप रे !!! इतना झगडालू चिडिया परिवार (-:

अमित जैन (जोक्पीडिया ) said...
लगता है हमरी बला आप के ऑफिस आन पड़ी है , जरा सभाल कर कुछ दिनों मे ये सर पर भी चोच मरेगे , .................:)

हराम जादा
पी.सी.गोदियाल said...
काफी मजेदार हास्यव्यंग्य था आपका ! ये बुढाऊ लोग होते ही ऐसे है ! जवानी भर अच्छे कर्म तो खुद किये नहीं और बुढापे में चले दूसरो को नसीहत देने और तंग करने ! जैसे बीज बोवोगे फल भी तो वैसे ही मिलेंगे ! वो तो मुझे लगता है की बहु किसी शरीफ घराने की थी जो बेचारी सिर्फ चंद शब्द बोलकर ही चुप रह गई, वरना कोई दबंग घराने की होती तो देती बुढाऊ की रीढ़ की हड्डी तोड़ के ! बुड्ढे ने खाना पीना छोड़ के नुकशान अपना ही किया, महीने भर में ही खिसक लिया नहीं तो दो-चार साल और पूरी पेंशन खा लेता ! :-))))

उबुन्टू लिनक्स लाइव सी डी से ले बेकअप ख़राब विण्डो कंप्युटर का
Suresh Chiplunkar ने कहा…
शेखावत जी, उबुन्टू की सीडी मंगवाये हुए 6 माह हो चुके, आज तक नहीं आई, अब लगता है डाउनलोड ही करना होगा…। फ़ारमेट करके दोबारा सब कुछ इंस्टाल करने की समस्या और घबराहट से शायद थोड़ी मुक्ति मिलेगी…

ऑटो वाले का बेहतरीन डायलॉग
कुश said...
पट्ठा फिल्मो में आएगा किसी दिन..

देसी शराब
अभिषेक ओझा said...
देशी दारु भी मिल गयी... तभी तो गंगा 'मैया' कहते हैं. बाकी नृत्य पर क्या कहें, श्लील हो या अश्लील हमें क्या. फोकट में कहीं चलते-फिरते दिखा तो देख लेंगे :)

खुद को खड़ा हम पाते हैं
आदित्य आफ़ताब "इश्क़" said...
विदा तो सबको लेना जी एक दिन ,पर आप विदा ले इसका हक आपको कतई नहीं हैं .............वाणी जी ने बिलकुल सॉलिड कहा हैं .............आपकी महफ़िल में सुबह-शाम होती रहे ........हमारा वादा हैं सज़दे पर आते रहेगे .............फिर कहे का एकाकीपन ..............अमाँ भूल ही गया कहना रचना बहुत दिलकश हैं ..........अरे इसमें कहने की क्या बात हैं .........मैं भी न अनाड़ी हूँ ज़रा ...........अब मुस्कुरा भी दीजिए ........हहहहहहः ..........................

बिना तू तू मैं मैं वाली जिन्दगी
seema gupta
विभीषण होगा माडरेटर मेरा । हनुमत करेगा टिप्पणी वगैरा।
सीता की जब यादैं अईहैं । झट से हम एक पोस्ट चढैंहैं।
कविता लिखिबे धांसू वाली । वार वियोग न जैहे खाली।
रावण से कहो नेट लगवाओ । वाटिका अशोक मार्डन करवाओ।
हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा जवाब नहीं आपका भी हा हा हा

regards

यह है झाँसी की रानी का असली फोटो
जी.के. अवधिया ने कहा…
स्कूल में पढ़ा थाः

बुंदेले हरबोलो के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

उन अमर वीरांगना का चित्र दिखाने के लिए अनेक धन्यवाद!

प्रणय संबंध, विज्ञान और कुछ विचार.
आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal)
अच्छा वैज्ञानिक विवेचन.. हैपी ब्लॉगिंग

मेरे लिए फैसला आप लें....
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...
ये हर लड़की को बुरी नजर से देखना क्या होता है जी?

हूँ...लागता गुलज़ार बाबू बहुते बढियां से बुडबक बनायें हैं भाई......
पर विवेक सिंह पूछ रहे हैं. जिसका जवाब भी पढ ल्यो।
विवेक सिंह said... @ August 29, 2009 6:36 AM
कौन हो वत्स ?
हमसे बिना पूछे ?
इतना धाँसू बिलाग शुरू कर दिया,

@ विवेक सिंह ...रिश्ते में तो बरखुरदार हम तुम्हारे चचा लगते हैं और चचाओं को तुमसे परमिशन लेने की जरुरत नही है।

अब बकिया चर्चा फ़ुरसत मिले पे करिहैं जी।

5 comments »

  • venus kesari said:  

    अच्छा विवेचन.. हैपी ब्लॉगिंग :)

    venus kesari

  • हिमांशु । Himanshu said:  

    संग्रह अच्छा है । आभार ।

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    बहुत बेहतरीन, शुभकामनाएं.

    रामराम.

  • Ratan Singh Shekhawat said:  

    बढ़िया टिप्पणी चर्चा |

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    सुंदर प्रयास. सतत जारी रहे.

    रामराम.

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