, ,

गई मेरी भैंस पानी में … हाय मै क्या करूं... किस किस को बताऊं?

10/19/2009 Leave a Comment

टिप्पणी चर्चा के इस अंक में आपका स्वागत करते हुये चच्चा की टिप टिप कबूल किजिये।  चच्चा को उम्मीद है कि आप लोगन का दिवाली बिल्कुले झक्कास मना होगा।  चच्चा ने आपको जो फ़ूलझडी पटाखा दिया था ऊ आप लोगन को काफ़ी पसंद आया इसका लिये एक बार चच्चा आपको फ़िर से टिप टिप करते हुये इस टिप्पणी अंक का शुरुआत करते हैं.

सबसे पहले हमरा पिछला पोस्टवा पर ई वाला टिप्पणी जरा देखा जाये…..

 

Har Singar1 लवली कुमारी / Lovely kumari Says:

  • Posted on October 17, 2009 8:47 PM

  • लगता है कोई महिला है ही नही हिंदी ब्लॉग जगत में.
    पर अगर ऐसे ही पक्षपात होता रहा महिला ब्लोग्गरों में अपील है टिप्पणी चर्चा का बहिस्कार करें.
    :-)
    वैधानिक सूचना - इस टिप्पणी को आत्म प्रचार न समझा जाय. :-)



  • चच्चा टिप्पू सिंह कहिन : -

    हम ई कहना चाहुंगा कि चच्चा किसी के साथ पच्छपात नाही करता है ना.  ऊ का हुआ ना कि हमने चच्ची को कहा था कि जरा महिला ब्लागरों का फ़ूलझडी पटाका खरीदवा दो त ऊ कही रहिन कि त्योंहार का समय हमका फ़ुरसत नाही….

    तो हम ई अनुरोध करता हुं कि कोई महिला आगे आये ब्लाग जगत से और चच्चा को इस काम मा तनि सहयोग करें। हम बहुते आभारी रहुंगा। वैसे हम कोशीश कर रहा हूं..महिला ब्लागर्स का खातिर भी ऐसा एक स्पेशल अंक तैयार करने का लिये। अरे भाई झा जी..आप कहां चले गये? ई काम जरा आप ही करिये ना।   और हम घोषणा करता हूं कि हम पच्छपात नाही करता हूं…हां अपना मां, बहन  अऊर बेटी लोगन  का लिये दिल मा मान सम्मान जरुर राखत हैं…इसको पच्छपात नाही समझा जाये। इ सम्मान हम कायम रखते हुये ही कोनू काम करुंगा।

     

    अब जरा ई बडकी टिप्पणी देखा जाये….. जो देशनामा ..पर विचरण करते समय मिली…

    sharad-kokas  शरद कोकास said...

    अरे शिवम मिश्रा जी ..मै पिछली पोस्ट के समापन समारोह मे क्या गया आप मुझसे पहले यहाँ पहुंच गये । चलिये कोई बात नही .. मै तो गुरुदत्त को याद कर रहा था । आज खुशदीप और सागर के सम्वाद( जी हाँ सम्वाद , इसे विवाद ना कहें हम ,विवादों से पहले ही ऊब चुके हैं हम ) को पढ़कर बहुत कुछ याद आ रहा है । ब्लोगिंग से शुरू हुई बात अंत में पापुलर सिनेमा और यथार्थवादी सिनेमा या कला सिनेमा तक पहुंच गई । मै प्रवाह के उलट चलना चाहता हूँ इसलिये सबसे पहले गुरुदत्त की बात । गुरुदत्त ने आत्महत्या इसलिये नही की थी कि वे पॉपुलर नही थे , बल्कि इस लिये कि उनके भीतर एक ऐसा कलाकार था जो दुनिया को अपनी तरह से देखना चाहता था


    यहाँ मै कलाकार के रूप में लेखक को भी रख रहा हूँ और इस तरह असमय जान देने वाले अर्नेस्त हेमिंग्वे से लेकर गोरख पांडेय तक सभी लोग जिनके भीतर एक छटपटाहट होती है । लेखक दुनिया को अपने लेखन के अनुसार एक बेहतर दुनिया के रूप मे देखना चाहता है लेकिन जब वो ऐसा नही कर पाता या दुनिया उसके अनुसार नही हो पाती तो वह आउट साइडर बन जाता है और जब आउटसाईडर होकर भी चैन नही पाता तो नशे मे डूब जाता है और जब इसमे भी चैन नही मिलता तो अपने आप को खत्म कर देता है ।


    आज समय बहुत बदल चुका है । यथार्थ भी लोकप्रियता का बाना पहनकर आ रहा है । मेरा नाम जोकर फिर हिट हो गई है और जिस फिल्म से प्रेरित होकर वह बनी थी चार्ली चेपलिन की लाइमलाइट वह तो शुरू से हिट थी । आज ब्लैक जैसी कला फिल्मे भी पॉपुलर हो रही है । यह पॉपुलर कल्ट अब नये रूप मे प्रस्तुत है ।अब कोई भी असफलता से घबराकर आत्महत्या नही करता ।


    यदि इन सारी बातों को हम हिन्दी ब्लॉगिंग पर लागू करें तो इतनी निराशा की स्थिति नहीं है । सभी तरह का लेखन यहाँ हो रहा है गम्भीर भी सरल भी ,गम्भीरता मे सरलता और सरलता मे गम्भीरता लिये हुए भी । हम कितने ब्लॉग रोज़ देख पाते हैं ? शायद 10% भी नहीं । हर एक की अपनी क्षमता और सीमा होती है । सो जिससे जितना होता है निर्वाह करता है । इसलिये आप दोनों की ही बात सही है इसमे कोई विवाद नहीं होना चाहिये । एक बड़े कवि ने कहा है जो रचेगा सो बचेगा । ऐसा साहित्य जगत मे भी होता आया है । मंच पर धूम मचाने वाले या मंच लूट ले जाने वाले कितने लोगों के नाम आपको याद है । एक बार शैल चतुर्वेदी यहाँ आये भास्कर के दफ्तर में बैठकर रो दिये कि मुझे कोई कवि नही समझता , फिर लोकप्रियता के लिये वे धारावाहिकों मे काम करने लगे । आज उन्हे न कोई कवि के रूप मे जानता है न कलाकार के रूप मे ।प्रिंट मीडिया मे भी यही होता है कुछ लोग चर्चित हो जाते है कुछ गुमनाम रह जाते है ।लेकिन समय सबकी पहचान करता है । तात्पर्य यह कि हमे अपना काम करते रहना है यह दुनिया क्षणभंगुर जो है (कट- कट- कट्.. मै तो उपदेश् करने लगा) तो भैया ऐसा है कि इस पर सब विद्वत्जन चर्चा करते रहे । आप लोगों ने चर्चा की , मज़ा आया अगर चुपचाप रज़ाई ओढ़ लेते तो हमे इसके सार के रूप मे यह चमकती हुई रेडियम की घड़ी कैसे दिखाई देती ।



    टिप्पणी की टिप टिप् :-आज नरक चतुर्दशी के इस पावन अवसर पर सुगन्धित उबटन से अवश्य नहायें । कम से कम बाहर का मैल तो निकल ही जाये ।

    October 16, 2009 3:58 AM
     अब आगे बढा जाये तनि…
     
    दीपावली की शाम, और मेरे ब्लोग्गिंग के दो वर्ष पूरे ..यानि डबल बधाई..

     

     राजीव तनेजा ने कहा…

    आपकी मंदाकनी(राज कपूर वाली या फिर दाउद वाली नहीं) का इंतज़ार रहेगा
    बाअदब...बामुलाहिज़ा...होशियार...
    द्वितीय कक्षा में अच्छे नम्बरों से उतीर्ण होने पर आपको तीसरी कक्षा में प्रमोट किया जाता है।

    October 16, 2009 10:38 P

     अऊर आगे चलिये ….

     

    2307572-Bathing-Water-Buffalo-0 गई मेरी भैंस पानी में ….
    पर ई पता नाहि ना चला कि ताऊ इसी भैंसिया से बात करता है या कोई दूसरी से?

     

     Blogger अजय कुमार झा said...

    बहुत दूर दूर से डुबो कर मारा है भैंसिया को..लगता है आप भाभी से छुप छुपा कर लिख जाते हो।
    चलो आज मदर डेयरी से ही काम चलाओ..और दिवाली मनाओ।

    10:08 AM, October 17, 2009

     Blogger अविनाश वाचस्पति said...

    मदर डेयरी छोड़ो
    फादर डेयरी खोलो
    भैंस जाए पानी में
    गाय जाए राजधानी से
    मोबाइल और रामप्‍यारी
    जो न करा दें वही थोड़ा है
    इसमें घोड़ा क्‍यों नहीं जोड़ा है

    10:28 PM, October 17, 200

     

    इसका बाद   ……

     

    [aishwarya-rai.jpg] 

    तुम्हारी आंखें  आंखों मे देखते हुये…

    ब्लॉगर ललित शर्मा ने कहा…

    कहीं और आँख लग गयी थी,इसलिए तुम्हारी खुबसुरत आँखों की तरफ़ ध्यान नही गया, आज फ़ुरसत मे देखा तो लगा वाकई में खुबसूरत है,"तुम्हारी आँखें"
    दीवाली की राम-राम

    October 18, 2009 9:17 AM

    अभी तो बहुत सारी टिप्पणियां बाकी हैं…..

     

    हाय मै क्या करूं... किस किस को दिखाऊ

    My Photo


    ताऊ रामपुरिया said...

    लो जी, भाटिया जी ...ताऊ के रहते आप ये सारी दुनिया से पूछ रहे हैं? लोग क्या सोचेंगे कि डाक्टर ताऊनाथ के घर मे रहते ये ठीक नही कर पा रहे?
    आप भारत आवो तब इसको लेते आना. इसकी स्क्रीन पर ताऊ की भैंस का गोबर लीप कर चार घंटे धूप मे सूखाना फ़िर ११ नारियल इस पर से वार कर, जय बजरंग बली कहते हुये, ताऊ के लठ्ठ सिर्फ़ ३ लठ्ठ घुमा के मार देना...बस हो गया समझो काम. कभी बाकी की जिंदगी मे ये खराब होने की सोचेगा भी नही.
    इब दिवाली की रामराम.

    18 October, 2009 5:35 AM
    साईड मिरर-एक लघु कथा

    ब्लॉगर Harkirat Haqeer ने कहा…

    ओये होए ....ये साईड मिरर भी .....!!!
    अब मिरर में उसकी तस्वीर भी दिखा देते तो कोई बात होती न .....!!
    आपने तो कार ही कार में सबकुछ खत्म कर दिया घर की ओर मुड़ जाते तो ज़िन्दगी के मायने न बदल जाते .....????

    10/18/2009 02:07:00 अपराह्न

    साईड मिरर-एक लघु कथा

    ब्लॉगर डा० अमर कुमार ने कहा…


    साइड से वह लाइन तो नहीं मार रही होगी,
    लेडी पुलिस थी वह, जो ड्यूटी कर रही होगी
    काश कि उसके साइड मिरर में आप दिख जाते ।

    10/15/2009 11:47:00 अपराह्न

     
    "कठुवाए हुए एहसास ~~"

     

    Blogger Ekta said...

    खरीदने-बेचने से परे है ये लोग फिर भी
    देखिए किस तरह ये घोड़े बेचकर सोते हैं
    यथार्थपरक रचना. सभी शेर शानदार

    October 18, 2009 8:57 AM

     

    अब आगे चलते हैं…….

     

    मेरी अमित हैं वासनायें .... (गीतांजलि का भावानुवाद )


    दर्पण साह "दर्शन" says:
    October 18, 2009 2:08 PM

    Ye shayad teesri anudit rachna hogi Himanshu ji akhilam madhuram se saabhar :) jo main padh raha hoon....
    ...aur jaisa ki main pehle bhi keh chuka hoon ki in mein se kisi ke uppar bhi comment karna sambhav to hi par anuchit bhi !!


    Angerizi main 'thou' ka 't' Capital kar leiven. Choonki wo nirakar ke sandarbh main hai !!
    apke pitaji ki rachnaaiyen padhwatein rahein.
    Lagta hai 'Geetanjali' unka priya vishay hai....
    Apke pitaji ko padhta hoon to apne chacha 'Shri Rameshchandra Shah' ko padh raha honn sa lagta hai

    चांदी के सिक्कों की चमक तो हर अमवस्या को दीवाली की तरह जगमगा सकती है


    जी.के. अवधिया said...

    सच में ये ऊपरवाले का सिस्टम बड़ा ही विचित्र है। ऐसा क्यों है कि एक बच्चा तो करोड़पति के घर जन्मता है तो दूसरा झोपड़पट्टी में। सौभाग्य और दुर्भाग्य तो वहीं से शुरू हो जाता है।
    पर अनिल जी देखा जाए तो असंतोष जहाँ अभावग्रस्त गरीब लोगों में है वहीं सम्पन्न बच्चों में भी क्योंकि सभी लोग अपने से अधिक सुखी व्यक्ति से ही अपनी तुलना करते हैं। गरीब बच्चा अपनी तुलना सम्पन्न बच्चे से करता है तो सम्पन्न बच्चा अपनी तुलना अपने से अधिक सम्पन्न बच्चे से। यदि कोई स्वयं की तुलना अपने से कम सुखी व्यक्ति से करे तो उसे कभी भी असंतोष नहीं होगा।
    लक्ष्मीपूजन तो कल हो चुका, चलिए आज दीपावली मनाएँ।

    OCTOBER 18, 2009 1:56 PM

    हूँ मर ज्या सूं जद थारौ कांई हुसी :ताऊ बुझागर

     

    1. राज भाटिय़ा Says:

      Posted on October 18, 2009 2:53 PM

    2. बहुत सुंदर बात ताऊ तो होते ही बहुत सायाने है,ताऊ बेचारा क्रे भी तो कया करे, उसे तो गांव वालो मे झाड पर चढा रखा है जो.
      धन्यवाद इस सुंदर कहानी के लिये

    कभी ताऊ अपनी मेड-इन-जर्मन लठ की हुल्ल पट्टी देते हुऍ दिखाई देते है, कभी नटवरलाल तो कभी चाणक्य रुप में (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )

    My Photo'अदा' said... 
     October 18, 2009 7:16 AM

    Pankaj Babu,
    Jaaiye Jaaiye foojhadi chalaiye
    are kaahe ghabraate hain
    Chhota charcha par zabardast hai
    ab ham tipiyaate hain...
    shaandaar...

    बाबू बडा या पीएचडी थीसिस्!!


    मेरा फोटो

    संगीता पुरी Says:
    October 18th, 2009 at 9:11 am

    सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं , प्रशासन में हर क्षेत्र की यही दशा है .. जो वकील है , वह मानव संसाधन विकास मंत्री बनता है .. जिसने कभी कोयला नहीं देखा , वह कोयला मंत्री है .. और तो और गया नगर निगम में चिकित्‍सा पदाधिकारी एक इंजीनियर थे .. हमारा भारत इसलिए महान है !!

    यह मिनी पोस्ट महज दीवाली जगाने के लिए है !


    मेरा फोटो

    गिरिजेश राव said...

    आप को 'जागरण' की बधाई।
    मुझे भी कल आलस जगाना चाहिए था लेकिन कल दो पोस्ट कर बैठा। मतलब कि 36 की बजाय 63 कर बैठा। जाने आने वाल साल कैसा गुजरेगा !
    आपात स्थिति में कहीं जाना है। भाड़े की गाड़ी का ड्राइवर स्विच ऑफ किए हुए परुआ मना रहा है। बोर हो रहा हूँ सो लिख रहा हूँ। समूचे उत्तर भारत में काहिलों का ररताज अगर चुना जाय तो वह अवश्य लखनऊ से होगा।

    17 October 2009 17:04

    उत्क्रमित प्रव्रजन


    Ratan Singh Shekhawat said...

    गांवों में सिर्फ थोडी बिजली की कमी ही दिक्कत पैदा करती है बाकि गांव में आजकल सभी सुविधाएँ उपलब्ध है और जो कुछ कमी है वह पास के शहर से पूरी की जा सकती है | जातिगत धुर्विकरण भी गांव में कितना भी क्यों न हो इज्जत सबको शहर से बढ़िया मिलती है | मेरी निगाह में तो गांव में रहने का मजा ही निराला है | मै तो गांव की प्रष्ट भूमि का आदमी हूँ रिटायर्मेंट लेने के बाद सीधा गांव जा कर ही रहूँगा | सुविधा के लिए दो डेस्कटॉप रखूँगा एक खेत वाले घर में और एक गांव की हवेली में | वही से बैठकर इत्मिनान से ब्लॉग लिखा करूँगा |
    वाणी गीत जी आजकल गांव के लोग जितना आप समझते है उतने सीधे नहीं होते शहर से वापस गांव में जाकर बसने और उन्हें गंवार समझ हांकने वाले को गांव वाले एसा हांकते है कि वह अपना सारा शहरी ज्ञान भूल जाता है |

    गोपू बना 'हनुमान'...खुशदीप

    My Photo

     

     

    M VERMA said...

    गोपू तो खैर लौट ही आया है, उससे तो मिल ही लेंगे. जरा उस रामलीला वाले का हाल अपने त्रिकालदर्शी नेत्रो से देखकर बता दे तो धन्य हो जाऊँगा.
    बहुत मजेदार -- बयान करने का अन्दाज क्या कहने

    October 18, 2009 6:00 AM
    आओ गड्ढा सजाएँ

    ब्लॉगर वाणी गीत ने कहा…

    अरविन्दजी सच ही कह रहे थे आपके आलसी भाव के तिरोहित होने की सूचना देकर...दीपावली पर भी गड्ढे भरने की चिंता में हैं ...लम्बे आलस के बाद इतनी स्फूर्ति ...!!
    शुभ दीपावली.....!!

    October 18, 2009 5:01 AM

     

    ताऊ किसी दूसरे पर तोहमत नही लगाता-अपनी खिल्ली उडाकर ही हास्य के रुप मे व्यंग करता है-रामपुरिया जी


    furasatia ji

    अनूप शुक्ल ने कहा…

    आज की बारात के दूल्हा ताऊजी की जय हो। ताऊ कई शताब्दियों के क्यूट कोलाज लग रहे हैं। अच्छा किया कि रामप्यारी साथ नहीं आईं वर्ना फ़िर ताऊ को कौन देखता/सुनता/पढ़ता।


    ताऊ का इंटरव्यू धांसू रहा। टिप्पणियां के अलावा और तरह के रिकार्ड बनाते ताऊ इकबाल बुलंद रहे। ताऊ को अपना मग्गाबाबा का आश्रम वीरान नहीं करना चाहिये। २९ जून से वहां दिया नहीं जला।
    हमारा लेखन पसंद करने की बात कहकर ताऊ और तदोपरान्त समीरलाल जी ने हमें मारे शरम के लाल कर दिया।


    दीवापली के बचे पटाखों की तरह दीपावली का बचा हुआ हिस्सा मुबारक हो।

    October 18, 2009 9:06 AM

     

    अऊर अब अंत मा ….आपके ब्लॉग ने छुआ 500 पोस्ट्स का आँकड़ा: बधाई………

  •  

    राजकुमार ग्वालानी October 18, 2009 7:46 AM My Photo

    इस दीपावली में प्यार के ऐसे दीए जलाए
    जिसमें सारे बैर-पूर्वाग्रह मिट जाए
    हिन्दी ब्लाग जगत इतना ऊपर जाए
    सारी दुनिया उसके लिए छोटी पड़ जाए
    चलो आज प्यार से जीने की कसम खाए
    और सारे गिले-शिकवे भूल जाए
    सभी को दीप पर्व की मीठी-मीठी बधाई

    My Photoडॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक October 17, 2009 9:35 PM

    500वीं पोस्ट की उज्जवल बधाई!
    यह दिया है ज्ञान का, जलता रहेगा।
    युग सदा विज्ञान का, चलता रहेगा।।
    रोशनी से इस धरा को जगमगाएँ!
    दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

    Udan Tashtari October 17, 2009 10:55 PMMy Photo

    जबरदस्त उपलब्धि वो भी इतने कम समय में.
    आपको ब्लॉगजगत में सरायनीय योगदान है.
    आपका साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.
    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!
    सादर

     

    अऊर अब चच्चा की टिप टिप…आप लोगों के इमेल हमको मिल रहे हैं…अऊर आपकी बात हम ध्यान से सुन रहा हूं। आप मेल करते रहिये। आपका सहयोग का लिये बहुते आभार आप लोगन का….चच्चा टिप्पुसिंह की टिप टिप…

    19 comments »

  • Udan Tashtari said:  

    चच्चा!! ये सही है कि कोई महिला ब्लॉगर आगे आयें और इस कार्य में हाथ बटायें..

    बहुत सही टिप्पणी चर्चा..दिवाली की मिठाई तो खिलाओ चच्चा..कि टिप टिप से काम चलायें. :)

  • शरद कोकास said:  

    ये शरद कोकास को क्या हो गया है ? टिप्पणी लिखते समय भूल गये कि टिप्पणी लिख रहे हैं पोस्ट नहीं ... ।

  • M VERMA said:  

    टिप्पणी चर्चा -- और फिर टिप्पणियो पर टिप्पणियाँ

  • M VERMA said:  

    टिप्पणी चर्चा मे किये गये टिप्पणियो पर भी चर्चा करेंगे?

  • श्रीश पाठक 'प्रखर' said:  

    टिप्पणियों का चयन भी उम्दा और टिप्पणियों पर टिप्पू सिंह का टिप्पणियां भी उम्दा..सुबह-सुबह ही जलेबी-पकौड़ी और चाय मिल जाती है, चचा के यहाँ...

  • Mishra Pankaj said:  

    जय हो चच्चा टिप्पू सिंह
    का बात है आज ता रतिए पोस्ट ठेल दिए चच्ची घर में नहीं घुसने दी का ?

  • Ratan Singh Shekhawat said:  

    चच्चा टिप-टिप चर्चा के साथ दिवाले के मौके पर बढ़िया फुल्झडियां छोड़ दिए हो |
    शुभाकामनाएं |

  • खुशदीप सहगल said:  

    चच्चा,
    ई भैंसिया नहा-धो करि का कैट-वॉक की तैयारी करिबा...

    जय हिंद...

  • ताऊ रामपुरिया said:  

    लगता है चच्चा ..आपने तो ताऊ की भैंस को ही पानी मे घुसेड दिया? चच्चा जरा रहम करो, हमारे पास इस भैंस और लठ्ठ के सिवा कुछ नही है.:)

    चच्चा टिप्पूसिंह की जय हो. बहुत लाजवाब टिप्पणी चर्चा किया चच्चा.

    रामराम.

  • अल्पना वर्मा said:  

    टिप्पणियों की भी चर्चा होती है??
    इस बात से अनभिग्य थी अब तक!

    यह अपने आप में एक अलग तरह की रोचक चर्चा है.

  • Anil Pusadkar said:  

    लाजवाब-ले जवाब,दे जवाब्।

  • लवली कुमारी / Lovely kumari said:  

    पहले तो मेरी टिप्पणी को चर्चा में शामिल करने का धन्यवाद ..

    आगे
    ..बहुत कम लोगों को इस मंच की जानकारी है प्रचार -प्रसार में लग जाइये कई लिखने वाले/वालियां मिल जाएंगी..अगर मुझमे जिम्मेवारिया उठाने की क्षमता होती तब जरुर चर्चा करती ..पर मैं ब्लोगिंग में बहुत अनियमित हूँ .
    सार्थक टिप्पनिओं की चर्चा करें नामो पर न जाएँ विषयवस्तु से मतलब रख कर निस्पक्ष चर्चा करें ..इस मंच के नामकरण को सार्थक करें ..शुभकामनायें .

    लवली

  • हिमांशु । Himanshu said:  

    लाजवाब टिप्पणी चर्चा । टिप्पणियों का चयन और प्रस्तुतिकरण बेहतर है । लवजी की टिप्पणी मूल्यवान है । खयाल करें । आभार ।

  • Vivek Rastogi said:  

    अरे वाह चच्चा बहुत बढ़िया टिप्पणी की टीप टिप चल रही है, सृजनात्मक कार्य है। चर्चा अच्छी बन पड़ी है।

  • पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said:  

    टिप्पणी चर्चा अब अपना जलवा बिखेरने लगी है...
    बढिया!!

  • अजय कुमार झा said:  

    चच्चा हम तो आपकी आज्ञा के इंतजार में थे..आउर ई ससुरा इंटरनेटवा भी तनिक डगमगाय रहा था...मुदा अब आप हरी झंडी दिखा दिये हैं..त देखिये एक ठो लेडिस हां लेडीज नहीं..जल्दीए पेश करते हैं..मजा न आ जाए तो कहियेगा...बस देखते जाईये...बकिया सब धमाल चल रहा है।

  • राजीव तनेजा said:  

    अरे वाह चचा...हमरी टिप्पणी...हमरी पोस्ट...अऊर हमरा टाईटल भी...बहुत-बहुत धनबाद(बिहार वाला नाहीं रे बबुआ)...


    अरे हाँ!...फोटू छापने के लिए लिए एक ठौ अऊर धनबाद

  • 'अदा' said:  

    @ खुशदीप
    और नहीं तो का....
    खाली पतरकियन के कैट-वाक् करे का हक है का महराज...
    भैसन के नसीब में इ सुख नइखे का ...हो ,,,???

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